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निष्पक्षता की कसौटी पर खरी उतरी ईवीएम

चुनाव आयोग द्वारा दी गई समय-सीमा के भीतर कोई भी दल ईवीएम की शिकायत करने नहीं पहुंचा। इससे यही साबित होता है कि ईवीएम बेदाग है। जब ईवीएम पर सवाल उठ रहे थे और चुनाव आयोग की भूमिका कठघरे में थी, तब...

निष्पक्षता की कसौटी पर खरी उतरी ईवीएम
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Pankaj Tomarहिन्दुस्तानSun, 16 Jun 2024 10:39 PM
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चुनाव आयोग द्वारा दी गई समय-सीमा के भीतर कोई भी दल ईवीएम की शिकायत करने नहीं पहुंचा। इससे यही साबित होता है कि ईवीएम बेदाग है। जब ईवीएम पर सवाल उठ रहे थे और चुनाव आयोग की भूमिका कठघरे में थी, तब कुछ संशय जरूर पैदा हुआ था, लेकिन जिस प्रकार से मतदाताओं ने अपने अधिकार का उपयोग किया और रिकॉर्ड संख्या में वोट डाले, वह प्रशंसनीय है। यह दिखाता है कि भारतीय लोकतंत्र में लोगों का किस कदर विश्वास है। हमारे लोकतंत्र की खूबी भी यही है कि इसने समय-समय पर खुद को साबित किया है। लिहाजा, हमारे नेताओं और प्रशासन को चाहिए कि वे पारदर्शिता और निष्पक्षता को हरसंभव प्राथमिकता दें। अंधेरे में रखकर उजाला ढूंढ़ना व्यर्थ है, इसलिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव-प्रक्रिया इतनी पारदर्शी रहे कि उस पर किसी प्रकार का कोई संशय पैदा न हो। लोकतंत्र की नींव भी तभी मजबूत रह सकती है, जब हम मिलकर इसके सिद्धांतों का पालन करें और इसे सशक्त बनाए रखें। अपने मताधिकार का सही उपयोग और सही उम्मीदवारों का चयन हमारे लोकतंत्र की असली जीत है।
अवनीश कुमार गुप्ता,  टिप्पणीकार


मतपत्र से बेहतर
ईवीएम से धांधली तभी हो सकती है, जब मतदान कराने वाली सरकारी टीम धांधली पर उतर आए। इंसान के चरित्र की गारंटी नहीं ली जा सकती, मशीन की ली जा सकती है। अच्छी बात यह है कि बाहरी धांधली रोकने के मामले में ईवीएम मतपत्र से बेहतर है। याद रखें कि मनुष्य-जनित धांधली की कोई सीमा नहीं है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि कोई ईवीएम मैलफंक्शन नहीं कर सकती या खराब नहीं होती। मुझे ऐसी कोई मशीन पता नहीं है, जो खराब नहीं होती। मगर भारत में अपवाद को सामान्य नियम बताने वालों की फौज खड़ी हो चुकी है। दो-चार मशीन खराब हैं, तो सारी की सारी खराब हैं! औसतन 100 में 10 मशीन खराब निकले, तो यह चिंता की बात तो है, पर उनके निर्माण में सुधार की जरूरत है। मशीन का खराब निकलना उत्पादन की समस्या है, न कि तकनीक की। एपल के उत्पाद इसलिए खराब नहीं निकलते कि उसकी तकनीक में समस्या है, बल्कि कुछ उत्पादों का उत्पादन मानकों के अनुरूप नहीं हो पाता। याद रखें, ईश्वर के बनाए इंसान मेें भी खामियां हैं, तो फिर उस इंसान की बनाई कोई चीज शत-प्रतिशत दुरुस्त कैसे हो सकती है? लिहाजा सवाल यह होना चाहिए कि कौन गुणवत्ता में बेहतर है? मेरी राय में ईवीएम बेहतर है। सब कुछ सही रहा, तो भारत इसका निर्यातक देश भी बन सकता है।
रंगनाथ सिंह, टिप्पणीकार

कोई भी मशीन सौ फीसदी सुरक्षित नहीं
ईवीएम में धांधली का मतलब सौ प्रतिशत मशीनों में धांधली नहीं है। हमारी सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में एक कहावत है कि सॉफ्टवेयर की सुरक्षा का सबसे कमजोर पक्ष इंसान होता है। ईवीएम भले ही हैक न हो सकती हो, लेकिन उसके हैंडलर, यानी उसका इस्तेमाल करने वाले जरूर हैक हो सकते हैं। यह समझने की जरूरत है कि वोट में गड़बड़ी बहुत तरह से की जा सकती है। मिसाल के तौर पर, फेक मशीन, सॉफ्टवेयर का हैक होना, लोगों को मिला लेना, चुनाव आयोग का दुरुपयोग करना, आचार संहिता का उल्लंघन, मीडिया का दुरुपयोग, वोटर लिस्ट से नाम गायब, वोट देने से रोकना आदि। वैसे भी, किसी निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल करने के लिए सारी ईवीएम हैक करने की जरूरत होती भी नहीं। बस कुछ महत्वपूर्ण मतदान-केंद्रों या इलाकों में धांधली की जरूरत होती है। और, यह काम करना बहुत कठिन नहीं है। अगर ईवीएम हैक नहीं हो पा रही, तो उनको गायब जरूर किया जा सकता है। उनका गलत इस्तेमाल हो सकता है! एक मतदान-केंद्र पर सारे मतदान-कर्मी आपस में मिले हो सकते हैं और भ्रष्टाचार कर सकते हैं! कोई भी सॉफ्टवेयर या मशीन की सुरक्षा उसके कोड या हार्डवेयर से ज्यादा उसके प्रयोग पर निर्भर करती है। ईवीएम को इस मामले में अपवाद नहीं मान सकते। यहां भी मशीन से छेड़छाड़ की जा सकती है। 
जसवंत, टिप्पणीकार


शंका निर्मूल नहीं
ईवीएम पर शंका बिना वजह नहीं है। राजनेताओं से यदि मित्रता में पूछिए, तो वे आपको बताएंगे कि किसी न किसी मोड़ पर उनसे कोई न कोई ऐसा मिला होगा, जिसने कहा होगा कि वह ईवीएम में जोड़-तोड़ करके उन्हें चुनाव जितवा सकता है। इस घोटाले की दर होती है ढाई-तीन करोड़ रुपये से लेकर पांच करोड़ रुपये तक। इसका मतलब तो यही है कि ऐसा कुछ होता है। तो, सवाल यह है कि कोई चुनाव आयोग के सामने क्यों नहीं आता? इस बार भी आयोग खाली हाथ क्यों रहा? उसके पास कोई शिकायत क्यों नहीं आई? इन सवालों के जवाब आसान हैं। अब आप बताइए कि आपके पास यदि सोने का अंडा देने वाली मुरगी हो, तो आप उसको मार खाएंगे या अच्छी तरह पाल-पोसकर रखेंगे, ताकि वह नियमित रूप से अंडा देती रहे? उम्मीद है, आप मेरी बात समझ गए होंगे। वैसे, आपको इंटरनेट पर यह खबर भी कई जगह मिल जाएगी कि हैदराबाद के जिस सज्जन ने ईवीएम को हैक करके दिखाया, उन पर सबसे पहले ईवीएम चोरी का मुकदमा दर्ज किया गया था।
विनोद वर्मा, टिप्पणीकार