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मचान और सुकून

मौसम राज की फेसबुक वॉल सेNaman Dixit
Sun, 10 Oct 2021 11:34 PM
मचान और सुकून

सुकून के पलों के लिए लोग पहाड़, पठार, समुद्री तट आदि दर्शनीय स्थानों पर घूमने जाते हैं, लेकिन क्या कभी आपने गांवों के मैदानों का सुकून महसूस किया है? बस्ती से दूर खेतों में बनने वाले मचानों पर? जब खेतनुमा पन्ने पर किसान अपनी चित्रकारी उकेरते हैं, तब स्वर्ग के आशियाने सा प्रतीत होते हैं मचान। इन पर आप जी उठते हैं। बेवजह की बातें मन में नहीं चलतीं। चारों तरफ से आप हरियाली से घिरे होते हैं। हवाएं फसलों को सहला रही होती हैं। भौंरे, कीट-पतंगें और मधुमक्खियां एक से दूसरे फूल, दूसरे से तीसरे फूल का रस चूस रही होती हैं। खुले आसमान में ऊंची उड़ान भर रहे पक्षियों के झुंड, घास चरती बकरियां, दूर-दूर तक फैले खेतों में काम करते किसान, अपनी गाय-भैंसों के लिए खुरपी से धास छील रही महिलाएं आपको बरबस खींच लाती हैं कुदरत के पास। बीच-बीच में मचान पर आकर बैठते, सुस्ताते और बातें करते हैं ये लोग, और फिर खेतों में लौट जाते हैं। कभी-कभी शाम को नीलगायों के झुंड को दौड़ाते हुए भी नजर आ जाएंगे किसान।
इन मचानों पर बैठकर सूर्योदय और सूर्यास्त को देखना सच में किसी विराट को देखने से कम नहीं है। ये नजारे आपको नई ऊर्जा से भर देते हैं। गांवों के मचानों पर कोई शाम जीकर देखिए। 
 

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