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मोदी मंत्र से ध्वस्त हुई मुख्य विपक्षी पार्टी

हार और जीत तो चुनाव के अंग हैं, लेकिन हालिया विधानसभा चुनावों में जिस तरह से कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी है, वह उसके लिए खतरे की घंटी है। दो राज्यों में भाजपा ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर...

मोदी मंत्र से ध्वस्त हुई मुख्य विपक्षी पार्टी
Amitesh Pandeyहिन्दुस्तानMon, 04 Dec 2023 11:03 PM
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हार और जीत तो चुनाव के अंग हैं, लेकिन हालिया विधानसभा चुनावों में जिस तरह से कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी है, वह उसके लिए खतरे की घंटी है। दो राज्यों में भाजपा ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया, जबकि एक राज्य में वह सत्ता-विरोधी लहर की आशंका के बीच अपनी सरकार न सिर्फ बचाने में सफल रही, बल्कि एक बड़ी जीत भी उसने हासिल की। दक्षिण में भाजपा के लिए कोई बड़ी उम्मीद नहीं थी, और यही बात पूर्वोत्तर के लिए भी कही जा सकती है, इसलिए वहां की चर्चा जरूरी नहीं है। शेष तीन राज्यों में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने थी, और वहां मतदाताओं ने भाजपा पर भरोसा दिखाया है। यह संकेत है कि जनता भी अब कांग्रेस से आजिज आ चुकी है।
हार की आशंका तो कांग्रेस नेतृत्व को भी थी, लेकिन अपनी बात ऊपर रखने के लिए वह सहमति नहीं दिखा रही थी। राजस्थान में एक बार भाजपा, तो एक बार कांग्रेस को सत्तारूढ़ होने का जनता मौका देती है, फिर भी कांग्रेस अपनी लोकलुभावन घोषणाओं में अपने लिए जीत ढूंढ़ रही थी, जबकि भाजपा ने कांग्रेस के कुशासन और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया। लोगों ने दोनों दलों की बातों को अनुभव की कसौटी पर कसा और रेवड़ियों के जोर पर सत्ता हथियाने निकली कांग्रेस के हवा-हवाई दावे को दरकिनार कर दिया। छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जिसने भाजपा को मौका दे दिया। रही बात मध्य प्रदेश की, तो कांग्रेस ने पूरी कोशिश की कि शिवराज सिंह चौहान को घेरकर वह अपने लिए रास्ता बना ले, लेकिन जनता ने बता दिया कि वह क्यों अपने ‘मामा’ से इतना प्रेम करती है। उसने पहले से भी अधिक सीटें देकर भाजपा को सत्ता-सदन की चाबी सौंप दी। 
देखा जाए, तो कांग्रेस को अब संभल जाना चाहिए। वह सिर्फ आलोचना करने के लिए भाजपा का विरोध न करे। उसे यह समझना होगा कि आज की जनता सब कुछ जानती है। कांग्रेस ने अति-उत्साह का परिचय दिया और यह समझ बैठी कि जनता उसके साथ है, जबकि असलियत में उसने कई ऐसे काम किए, जिससे आम लोग उससे नाराज हुए। राजस्थान में तो बेटियों की आवाज तक कांग्रेस सुनने से बचती रही। इन नतीजों ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि कांग्रेस के लिए मुश्किलों का अंत अभी नहीं होने वाला। इन परिणामों का असर 2024 के आम चुनाव को लेकर विपक्ष की तैयारियों पर भी पड़ सकता है और दिल्ली पर शासन की उसकी उम्मीदें ध्वस्त हो सकती हैं।
कांतिलाल मांडोत, टिप्पणीकार

उसकी स्थिति इतनी खराब भी नहीं
यह ठीक है कि खासकर छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस को निशाना बनाने का सभी को मौका मिल गया है, लेकिन ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का जो सपना देखा जा रहा है, वह अब भी सफल नहीं होगा। जब किसी चुनाव में कांग्रेस की हार होती है, तो कुछ लोग ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का राग अलापने लगते हैं, जबकि असलियत यह है कि आज के समय में भी सिर्फ कांग्रेस ऐसी पार्टी है, जो भाजपा को टक्कर दे सकती है। उसने ऐसा किया भी है, जिसमें उसे सफलता भी मिली है। हालिया चुनावों में भी कोई दल भाजपा के सामने यूं नहीं खड़ा था, जितनी चर्चा कांग्रेस की हो रही थी। एग्जिट पोल के बाद तक भाजपा की पेशानी पर बल कांग्रेस ही पैदा कर रही थी। अब नतीजे क्यों उसके इतने खिलाफ आए, यह अलग विश्लेषण का विषय है, लेकिन सिर्फ इसी आधार पर ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का सपना देखना गलत होगा। 
आज भी देश में कांग्रेस की खुद की या गठबंधन में राज्य सरकारें हैं। अभी जिन तीन राज्यों में कांग्रेस को हार मिली है, वहां भी पार्टी को अच्छा मत हासिल हुआ है। यह संकेत है कि इस पार्टी पर अब भी लोगों का भरोसा कायम है, बेशक मुख्य विपक्षी दल के रूप में ही सही। जिन-जिन लोगों को लगता है कि ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ हो जाना चाहिए, उनको शायद यह नहीं पता कि कांग्रेस कई दलों के लिए संजीवनी का काम करती है, इसलिए यदि उसकी जड़ें काट दी गईं और वह खत्म हो गई, तो कई अन्य दल भी अपना अस्तित्व नहीं बचा सकेंगे। तब एकमात्र दल ही देश में बचेगा, जिससे देश की व्यवस्था बदल जाएगी। जिस तरह से हालिया दिनों में सत्तारूढ़ पार्टी व्यवहार करने लगी है, उससे बहुत से लोगों को यही अंदेशा होता है कि वह एकदलीय व्यवस्था बनाना चाहती है, ताकि सिर्फ वही सत्ता में रहे। यह व्यवस्था भारत जैसे जीवंत लोकतंत्र के लिए कतई उचित नहीं है।
बेशक, हाल के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है, लेकिन हारकर फिर से खड़ा होना उसकी खूबी रही है। कई बार ऐसा हुआ है, जब विपक्षी दलों ने कांग्रेस को जमींदोज कर दिया, लेकिन कांग्रेस नई ऊर्जा के साथ न सिर्फ खड़ी हुई, बल्कि उसने मतदाताओं का दिल भी जीता। इस बार भी ऐसा ही होगा। भले ही अभी परिस्थिति उसके लिए प्रतिकूल है, लेकिन वह पूरी ताकत के साथ लौटेगी, क्योंकि कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जिसे लोग भारतीय जनता पार्टी के विकल्प के रूप में देखते हैं।
समिधा मिश्र, टिप्पणीकार
 

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