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सभी खिलाड़ियों के लिए एक सबक

अनुशासन के बिना सरल और सुगम जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। अगर आप अनुशासन नहीं मानते, तो आपकी जिंदगी भी अराजक होगी और आपकी कार्यशैली भी। खेल को इससे अलग नहीं रख सकते। अगर यहां भी कोई अनुशासन भंग...

सभी खिलाड़ियों के लिए एक सबक
Monika Minalहिन्दुस्तानFri, 01 Mar 2024 11:23 PM
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अनुशासन के बिना सरल और सुगम जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। अगर आप अनुशासन नहीं मानते, तो आपकी जिंदगी भी अराजक होगी और आपकी कार्यशैली भी। खेल को इससे अलग नहीं रख सकते। अगर यहां भी कोई अनुशासन भंग करता है, तो वह एक सफल खिलाड़ी नहीं बन सकता। श्रेयस अय्यर और ईशान किशन का मामला ऐसा ही है। इन दोनों ने खुद को कोच और बीसीसीआई से ऊपर समझा। इसका नतीजा यह निकला कि वे दोनों अब बीसीसीआई के अनुबंध से बाहर कर दिए गए हैं। क्रिकेट बोर्ड ने तो यहां तक कहा कि उनके नाम पर विचार भी नहीं हुआ। 
यह सही है कि किसी के साथ कोई जबर्दस्ती नहीं की जा सकती, लेकिन घरेलू क्रिकेट की अहमियत कम नहीं है। घरेलू क्रिकेट एक अच्छा खिलाड़ी बनने का आधार है और हर खिलाड़ी को इसे महत्व देना चाहिए। जब आप छोटी-छोटी चीजों पर गौर नहीं करेंगे, तो भला अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए खुद को कैसे तैयार कर सकेंगे? घरेलू क्रिकेट इन्हीं छोटी-छोटी बातों को या यूं कहें कि अपनी कमियों को समझने और उनसे निपटने का मंच है। इसीलिए, श्रेयस अय्यर और ईशान किशन को जब घरेलू क्रिकेट खेलने के लिए कहा गया, तो उन्हें खेलना चाहिए था। कुछ दिनों पहले बीसीसीआई सचिव ने भी कहा था कि टीम इंडिया में खेलने की इच्छा रखने वाले खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट खेलना चाहिए और ऐसा न करने पर अंजाम बुरा हो सकता है। मगर उनकी चेतावनी के बावजूद इन दोनों खिलाड़ियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। उन्हें शायद यह भ्रम था कि प्रतिभाशाली खिलाड़ी होने के कारण बोर्ड उनके प्रति नरम रवैया अपनाएगा, जबकि वे भूल गए थे कि भारत में गली-गली में क्रिकेट का खेल खेला जाता है और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की अब कोई कमी नहीं। खासकर आईपीएल ने टीम इंडिया के लिए कई नए खिलाड़ी तैयार किए हैं।
स्पष्ट है, जिस तरह से ईशान किशन और श्रेयस अय्यर को सालाना अनुबंध से बाहर किया गया है, वह चौंकाता नहीं है। इसका अंदेशा पहले से था। ऐसा करके भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने एक तरह से उन सभी खिलाड़ियों को आगाह कर दिया है, जो यह सोचकर अनुशासन तोड़ते रहते हैं कि उनका कोई बाल-बांका नहीं कर सकता। बीसीसीआई का यह सख्त फैसला न सिर्फ मौजूदा खिलाड़ी, बल्कि भविष्य के खिलाड़ियों के लिए भी सबक है कि वे अनुशासन का हमेशा पालन करें, अन्यथा देश में प्रतिभाओं की बहुतायत उनकी राह मुश्किल बना सकती है।
दीपक, टिप्पणीकार
ईशान-अय्यर के साथ बर्ताव सही नहीं
श्रेयस अय्यर और ईशान किशन के साथ जो हुआ है, वह भले ही प्रथम दृष्टया सही लग रहा हो, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह भी है कि क्या इन दोनों खिलाड़ियों में प्रतिभा की कोई कमी है? क्या राहुल द्रविड़ के कोच बनने से पहले भी ईशान और अय्यर इस तरह का बर्ताव करते थे या उनके व्यवहार में बदलाव द्रविड़ की नियुक्ति के बाद आया है? सोचिए, क्या जो नियम बीसीसीआई ने बनाया है, वह राहुल द्रविड़ के कोच बनने से पहले और ईशान किशन के रणजी मैच खेलने से इनकार से पहले बनाया गया था? सवाल यह भी है कि जब नियम बाद में बनाया गया, तो ईशान और अय्यर पहले ही उसका उल्लंघन कैसे कर चुके थे कि उनको अनुबंध से ही बाहर कर दिया गया? सवाल यह भी है कि जो श्रेयस अय्यर अभी तक टीम प्रबंधन के चहेते हुआ करते थे, आखिर अचानक वह इतने बुरे कैसे बन गए, जबकि दोनों खिलाड़ियों को चेतावनी देकर भी अनुबंध से जोड़ा जा सकता था?
इन सबसे तो यही प्रतीत होता है कि श्रेयस अय्यर और ईशान किशन के साथ नाइंसाफी हुई है। इन दोनों ने इतना बड़ा अपराध नहीं किया था कि इनको अनुबंध के लायक ही न समझा जाए, लेकिन यहां एक बात इन दोनों खिलाड़ियों को भी समझनी होगी कि इनके भविष्य के दरवाजे फिलहाल बंद करने की कोशिश जरूर की गई है, लेकिन वे अपने अच्छे प्रदर्शन से इस दरवाजे को फिर से खोल सकते हैं। बस, इसके लिए उन्हें आईपीएल में माद्दा दिखाना होगा। 
श्रेयस अय्यर और ईशान किशन जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की टीम इंडिया को सख्त आवश्यकता है, इसलिए बीसीसीआई और कोच राहुल द्रविड़ का अड़ियल रवैया इनकी प्रतिभा को कुंद कर सकता है। एक अभिभावक (राहुल द्रविड़) गलत रास्ते पर जा रहे अपने बच्चे को समझाकर सही मार्ग पर लाने का प्रयास करता है, वह परिवार (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) अच्छा हो बुरा, अपने लोगों का साथ कभी नहीं छोड़ता। बीसीसीआई अपने इन दोनों होनहार खिलाड़ियों को समझा सकता था और सही रास्ते पर लाने का प्रयास कर सकता था। इससे उसका कद और ऊंचा होता। मगर बोर्ड इसमें चूक गया। अलबत्ता, उसने कुछ ज्यादा सख्ती दिखाते हुए इन दोनों को जिस तरह से अनुबंध से बाहर किया है, उससे हर क्रिकेटप्रेमी के सामने यही सवाल है कि ईशान किशन और श्रेयस अय्यर के साथ क्रिकेट बोर्ड और कोच राहुल द्रविड़ ने ऐसा बर्ताव क्यों किया? इसका जवाब एक न एक दिन जरूर सामने आ जाएगा।
अनिल कुमार यादव, टिप्पणीकार
 

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