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युआन गिरने पर कैसा डर

कश्मीर पर जोरदार बहस के बीच एक दोस्त ने कहा, और भी गम हैं दुनिया में कश्मीर के सिवा। चीन की करेंसी युआन का तेजी से गिरना क्या कम मुसीबत वाली खबर है? मैंने कहा कि यह तो अमेरिका और चीन के बीच जो ट्रेड वार चल रहा है, उसकी ही अगली कड़ी थी। अमेरिका ने चीन के सामान पर टैरिफ बढ़ाया, तो बदले में चीन ने युआन की वैल्यू कम करके विदेश में बिकने वाली अपनी वस्तुओं को सस्ता कर दिया। इससे हमें क्यों घबराना चाहिए?

मेरे दोस्त ने कहा- दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं कारोबार पर इतना लड़ेंगी, तो पूरी दुनिया में मंदी का खतरा बढ़ेगा। वैश्विक मंदी का मतलब हुआ हमारे एक्सपोट्र्स के लिए कम खरीदार मिलेंगे। अब निर्यात में तेजी के बगैर आप अर्थव्यवस्था में तेजी कैसे ला सकते हैं? यह भी याद रखिए, चीन के साथ हमारा व्यापार घाटा 53 अरब डॉलर का है। हम चीन को 17 अरब डॉलर का निर्यात करते हैं और वहां से हमारे यहां 70 अरब डॉलर का आयात होता है। ऐसे में, चीन की करेंसी में और भी गिरावट होती है, तो हमारे देश में उसके सामान और सस्ते हो जाएंगे और तब अपने देश की बाकी बची मैन्यूफैक्र्चंरग इकाइयों पर भी ताले लग जाएंगे। फिर नई नौकरियों का क्या होगा? क्या हम इसके लिए तैयार हैं?
 

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  • Web Title:Hindustan Cyber Sansar Column on 9th August