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जुर्माने का औचित्य

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री की इस बात से असहमत होने का कोई कारण नहीं है कि मोटर वाहन अधिनियम-2019 में बढ़ा जुर्माना सरकार का खजाना भरने के लिए नहीं, बल्कि भारत की सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए है। यह सही है कि दुनिया में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं भारत में हो रही हैं। हमारे देश की सड़कों पर हर साल करीब डेढ़ लाख लोगों की मृत्यु का प्रमुख कारण ट्रैफिक नियमों का पालन न किया जाना है। हम मानते हैं कि सड़कों पर ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को इतनी कड़ी सजा मिलनी चाहिए कि वे दोबारा ऐसा करने की हिमाकत न करें।

पर एक बाइक चालक से 23,500 और ऑटो चालक से 47,500 रुपये के जुर्माने को कैसे कोई जायज ठहराए? जुर्माना वसूलने के तरीके को व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। किसी चालक के एक समय में कई नियमों के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर जुर्माना जोड़कर वसूलना उचित नहीं है। व्यावहारिक यही है कि जिस अपराध के लिए अधिकतम जुर्माना बनता है, वही राशि वसूली जाए। ज्यादातर दुर्घटनाएं हाईवे पर होती हैं। शहर के अंदर छोटे-मोटे काम के लिए निकलने वालों को परेशान करने की बजाय एक से दूसरे शहर जा रहे लोगों पर फोकस किया जाए, तो दुर्घटनाएं भी कम होंगी और भ्रष्टाचार की शिकायतें भी कम मिलेंगी। 

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  • Web Title:hindustan cyber sansar column on 11 september