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अब व्यापम बन गई नीट परीक्षा

मानसिक रूप से सक्षम बनाना चाहिए। अगर वे दिमागी तौर पर तैयार रहेंगे, तो किसी भी अप्रिय हालात से जूझ सकेंगे। हमें समझना चाहिए कि कोई भी प्रतियोगी परीक्षा यूं ही आयोजित नहीं कर दी जाती। ...

अब व्यापम बन गई नीट परीक्षा
Monika Minalहिन्दुस्तानTue, 11 Jun 2024 09:54 PM
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अन्य परीक्षाओं के साथ अब नीट की परीक्षा भी मध्य प्रदेश की व्यापम जैसी स्थिति में आ गई। पिछले कई वर्षों से ये साजिशें भारत के उन नौनिहालों के भविष्य के विरुद्ध की जा रही हैं, जिनकी सक्रियता से भारत का राजकाज ही नहीं, असंख्य परिवारों के बरसों से देखे और पाले जा रहे सपनों को पूरा होना है। हमारी सरकारें आखिर इन होनहार बच्चों के विश्वास पर खरी उतरने को तैयार क्यों नहीं हैं? क्या वे कुछ ऐसे समूहों को आधिकारिक लाभार्थी मान चुकी हैं, जो उनकी अपनी नागरिक आबादी के अंतर्गत ‘रजिस्टर्ड’ हैं?
विजय बहादुर सिंह, साहित्यकार
माफिया का खेल
नीट शायद भारत की सबसे विवादित परीक्षा है। जब 2018 में मैंने यह परीक्षा दी थी, तब मेरे 533/720 अंक थे और रैंक थी 11,254। उसके बाद से जो कटऑफ बढ़ना शुरू हुआ, वह कभी कम नहीं हुआ। 2022 में जब छोटे भाई ने यह परीक्षा दी, तब उसके 604/720 अंक पर 19,900 रैंक थी। मुझे लगा शायद बच्चे ज्यादा पढ़ते हैं या पेपर बहुत आसान हो गया हो। इस बार जब नीट का रिजल्ट आया, तो यकीन ही नहीं हुआ कि ऐसा कटऑफ भी हो सकता है। कई बच्चों के तो शत-प्रतिशत अंक आए हैं, यानी 720 में 720। कटऑफ बढ़ने के कई कारण हैं। जैसे, हर सरकारी कॉलेज में तीन-चार सॉल्वर गैंग होते हैं, जो कमजोर परीक्षार्थियों की जगह बैठकर परीक्षा देते हैं। बदले में उन्हें सात से 20 लाख तक की रकम मिलती है। इसी तरह, कुछ परीक्षा माफिया हर साल पेपर लीक करते हैं, फिर चाहे 2015 का पेपर लीक हो या 2024 का। खबर तो यह भी है कि कई छात्रों को एक दिन पहले पेपर रटवाया जाता है। इसमें ऐसे छात्र भी होते हैं, जो नीट में तो सफलता के झंडे गाड़ते हैं, लेकिन कॉलेज की परीक्षा पास करने में नाकाम रहते हैं। इस बार भी ऐसे कुछ छात्रों की जानकारी मीडिया दे रहा है, जिन्होंने नीट परीक्षा में तो अच्छी रैंक हासिल की है, लेकिन कॉलेज की परीक्षा में औंधे मुंह गिर गए हैं। इन सब पर लगाम तो प्रशासन या संबंधित विभाग ही लगाएगा, लेकिन कुछ अन्य बातें हैं, जो हमें जान लेनी चाहिए। जैसे सिर्फ डॉक्टर बनना ही जीवन का मकसद न बनाएं। इतना ही नहीं, नीट रूपी दलदल में इतना भी न धंस जाएं कि बाहर निकलने की गुंजाइश न बचे। जीवन इस एक परीक्षा से कहीं बड़ा है, इसलिए यह परीक्षा यदि आप पास करते हैं, तो अच्छा है, वरना इंतजार न करें, कुछ अलग सोचें।
तन्मय कुंज, चिकित्सक
इसे रद्द करना सही नहीं होगा
नीट परीक्षा के परिणाम पर कुछ थोड़े से अभिभावक और परीक्षार्थी अंगुली उठा रहे हैं और परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं। क्या ऐसा करना उन परीक्षार्थियों के साथ अन्याय नहीं होगा, जिन्होंने अथक परिश्रम के बाद मेडिकल परीक्षा में सफलता हासिल की है? नीट, जेईई या अन्य कोई भी प्रतियोगी परीक्षा हो, परीक्षार्थियों को हर परिणाम के लिए तैयार रहना चाहिए। अभिभावकों को भी अपने बच्चों को सफलता और असफलता, दोनों स्थितियों के लिए मानसिक रूप से सक्षम बनाना चाहिए। अगर वे दिमागी तौर पर तैयार रहेंगे, तो किसी भी अप्रिय हालात से जूझ सकेंगे। हमें समझना चाहिए कि कोई भी प्रतियोगी परीक्षा यूं ही आयोजित नहीं कर दी जाती। इसमें लंबी व्यवस्था काम करती है। ऐसे में, उन पर सवाल उठा देना सही नहीं जान पड़ता। आज लोग अपने बच्चों को दौड़ में खड़ा करके छोड़ देते हैं, जबकि उन्हें विफलता का घूंट पीना भी सिखाना चाहिए।
शैलबाला कुमारी, गृहिणी
ताकि धोखा न हो
इस बार की अखिल भारतीय मेडिकल परीक्षा, यानी नीट में कुछ विद्यार्थियों द्वारा शत-प्रतिशत अंक लाने के बाद विवाद सामने आ गया है और गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। बेशक इसकी निष्पक्ष और उचित जांच होनी चाहिए, लेकिन यह भी हो सकता है कि बच्चों ने अपनी मेहनत के बल पर शानदार अंक प्राप्त किए हों। ऐसे में, नीट परीक्षा के परिणामों को रद्द करना वास्तव में मेहनतकश परीक्षार्थियों के भविष्य से खेलने जैसा होगा। इतना ही नहीं, परीक्षा रद्द होने के बाद क्या स्थिति बनती है, यह बात भी किसी से छिपी नहीं है। कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश में कांस्टेबल भर्ती परीक्षा इसलिए रद्द करनी पड़ी थी, क्योंकि उसके प्रश्न-पत्र लीक हो गए थे। तब खबर आई थी कि इस परीक्षा में करीब 45 लाख से अधिक नौजवानों ने अपने सुनहरे भविष्य के निर्माण के लिए हिस्सा लिया था। इसी तरह, हिमाचल सरकार ने भी कुछ समय पहले प्रदेश के कर्मचारी चयन आयोग को भंग कर दिया था, क्योंकि वहां गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई थी। इन सबसे नुकसान नौजवानों का ही होता है, क्योंकि दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी वही कर रहे होते हैं। कभी पेपर लीक करके, तो कभी 
अन्य तरह से जो भ्रष्टाचार किया जाता है, उसका तोड़ निकालना जरूरी है। इसका उपाय यह नहीं है कि परीक्षा रद्द करके उन मेहनतकश छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जाए, जो दिन-रात तैयारी में लगे रहते हैं। 
राजेश कुमार चौहान, टिप्पणीकार