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त्योहार और तमीज

होली आते ही कुछ लोगों की मानसिकता जैसे गटर में गिर जाती है। हर साल होली के मौके पर न जाने कितनी लड़कियों पर कंडोम में रंग भरकर फेंकने की घटनाएं देखने-सुनने को मिलती हैं। क्या यह होली खेलने का तरीका है? मतलब, इतनी घटिया हरकत का मतलब क्या है? ये घटनाएं आपकी मर्दानगी को प्रमोट नहीं करतीं, बल्कि बताती हैं कि एक समाज के तौर पर हम रोजाना कितने नीचे गिरते जा रहे हैं। हर लड़की को वह सुरक्षित माहौल दें कि वह होली पर घर से बाहर कदम रखने से डरे नहीं। ‘बुरा न मानो, होली है’ जुमला किसने शुरू किया था, यह तो नहीं मालूम, लेकिन इसे जल्द बंद करने की जरूरत है।

होली शुरू नहीं होती कि हर कोई आकर रंग लगा देता है और कहकर चला जाता है कि ‘बुरा न मानो, होली है।’ बुरा मानने वाली हरकत पर इंसान बुरा न माने, तो और क्या करे? इसलिए गुजारिश है कि प्लीज, किसी को भी जबरदस्ती रंग न लगाएं। यह बहुत बेसिक चीज है समझने की। होली रंगों का त्योहार है, मस्ती का त्योहार है, उसे वही रहने दीजिए, रंग भरे कंडोम लड़कियों पर फेंककर या किसी को जबरदस्ती रंग लगाकर उसके लिए इस त्योहार की यादें मत खराब करिए। इंसान बनना वाकई बहुत आसान है, इस होली कोशिश करके देखिए।

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  • Web Title:Hindustan Cyber Sansar Column March 21