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6 अगस्त, 2020|12:13|IST

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यह आकाशवाणी है

भारत में रेडियो प्रसारण को शुरू हुए 93 साल पूरे हो गए। 23 जुलाई को एक निजी कंपनी ‘इंडिया ब्रॉडकास्टिंग कंपनी लिमिटेड’ ने मुंबई प्रसारण केंद्र से रेडियो प्रसारण शुरू किया था। देखते-देखते रेडियो न सिर्फ हमारी दिनचर्या में शामिल हुआ, बल्कि इसने हमारी दिनचर्या को अपने ढंग से ढाला भी। अगर आपका बचपन मेरी तरह 1970-80 के दशक में बीता है, तो बहुत संभव है कि अक्सर सुबह उठकर न तो आपने चिड़ियों की चहचहाहट सुनी होगी, न शंख-घड़ियाल और न ही अजान, बल्कि चेकोस्ल्वाकिया में पैदा हुए और नाजियों के आतंक से भागे यहूदी संगीतकार वाल्टर कॉफमन की धुन से आपके दिन की शुरुआत होती होगी। कहते हैं कि यह धुन राग शिवरंजनी पर आधारित है। रेडियो ने हमारा रंजन भी किया, हमारे बोध के दायरे को विस्तार भी दिया और एक समय तो इसने हमारे ऊपर शासन भी किया। लोग अपनी घड़ियां इसी से मिलाया करते थे। सर्द रातों में ठीक 7.30 पर सुनाई पड़ता, ‘यह आकाशवाणी है। अब आप अनंत कुमार से प्रादेशिक समाचार सुनिए।’ अगले दस मिनट तक हम भाई-बहनों को खामोश रहना होता था। सर्दियों में प्रादेशिक समाचार के बाद हमें पढ़ाई से छुट्टी मिल जाया करती, तो गरमियों में 8.40 के राष्ट्रीय समाचार के प्रसारण तक पढ़ना पड़ता था।
 

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  • Web Title:hindustan cyber sansar column 24 july 2020