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30 नवंबर, 2020|6:58|IST

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जो इमरान ने नहीं समझा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने खुद को ‘आस्था के रक्षक’ और ‘मुस्लिम दुनिया के चैंपियन’ के तौर पर दिखाने की कोशिश की है। फ्रांस के ताजा घटनाक्रम पर उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति मैक्रों ने ईशनिंदापूर्ण कार्टूनों के प्रदर्शन को बढ़ावा देने के जरिए अपने नागरिकों समेत मुस्लिमों को जान-बूझकर भड़काने वाला पक्ष चुना’। दरअसल, यूरोप एक धर्मनिरपेक्ष क्षेत्र है, जहां लोगों ने किसी भी नियम-कायदे में ईसाईयत की जड़ों को शामिल न करने के लिए संघर्ष किया। वहां कानून का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। यूरोप धार्मिक आजादी, बोलने की आजादी, धार्मिक और नस्लीय आधार पर किसी के साथ भेदभाव न होने के अधिकारों की रक्षा करता है। कैथोलिक चर्च को निशाना बनाने वाली कई फिल्मों और व्यंग्यपूर्ण कार्टून को लेकर फ्रांस और इटली, दोनों में अतीत में काफी संघर्ष देखने को मिले हैं। कैथोलिक चर्च ने उन्हें रोकने की कोशिश की (गला काटकर नहीं, बल्कि ट्राइब्यूनल्स के जरिए) और वे लगातार इस संघर्ष में हारते भी रहे। इमरान खान ने जो नहीं समझा, वह यह कि संभव है, यूरोप के लोग भी शार्ली एब्दो के निम्नस्तरीय ह्यूमर से सहमत न हों, लेकिन वे बोलने की आजादी, अपनी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए सब कुछ करेंगे।

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  • Web Title:hindustan cyber sansar column 02 november 2020