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दूरदर्शी साराभाई

एक सबसे अच्छा लीडर वह होता है, जो अच्छे लीडर तैयार करे। इस मायने में विक्रम अंबालाल साराभाई काबिल लीडर कहे जा सकते हैं। पूर्व राष्ट्रपति कलाम ही नहीं, इसरो के पूर्व अध्यक्ष के कस्तूरीरंगन से लेकर वैज्ञानिकों की एक ऐसी पीढ़ी साराभाई ने तैयार की, जो भारतीय वैज्ञानिक जगत की रीढ़ कही जा सकती है। 1950 का दशक था।

साराभाई ने 1947 में अहमदाबाद में ‘भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल)’ की स्थापना की थी। उनके  पिता उद्योगपति थे, उन्होंने अपने पिता से ही इसके लिए वित्तीय मदद ली थी। तब साराभाई की उम्र महज 28 साल थी, पर कुछ ही वर्षों में उन्होंने पीआरएल को विश्वस्तरीय संस्थान बना दिया, और बाद में भारत सरकार से उसे मदद मिलने लगी।

जुलाई 1957 मेें सोवियत रूस ने दुनिया का पहला उपग्रह ‘स्पूतनिक’ पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया था। इस  लॉन्चिंग के साथ अचानक दुनिया के तमाम देशों की दिलचस्पी अंतरिक्ष विज्ञान में हो गई थी। विक्रम साराभाई ने पंडित नेहरू को चिट्ठी लिखी कि भारत को भी इस दिशा में काम करना चाहिए। उनकी सलाह मानते हुए 1962 में इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च (इनकॉस्पर) बना पंडित नेहरू ने इसकी कमान साराभाई को सौंप दी। यही इनकॉस्पर बाद में इसरो बना।

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  • Web Title:Hindustan Cyber Sansar august 13th