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डरिए, डरना जरूरी है

पाकिस्तान में आसिया बीबी के मामले को लेकर यू-ट्यूब पर बहुत सारी सामग्रियां हैं और मैंने बहुत कुछ सुना भी है। यह एक भयावह अनुभव है। यह पूरी दुनिया के तमाम समुदायों के लिए एक सबक है कि कट्टरता किस हद तक घातक है। आप कल्पना कीजिए कि किसी लोकतांत्रिक देश में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, सेनाध्यक्ष ही नहीं, वजीर-ए-आजम तक को कत्ल करने की खुलेआम धमकियां दी जा रही हैं। आसिया बीबी के मुकदमे की पैरवी करने वाले वकील को सपरिवार मुल्क छोड़कर भागना पड़ा। पत्रकार चैनल पर इस खबर की तन्कीद नहीं कर सकते, क्योंकि उनकी हत्या हो सकती है। मौलवी खुलेआम न्यायालय, सेना और शासन की ऐसी-तैसी कर रहे हैं। ऐसी बात नहीं कि पाकिस्तानी अवाम यह सब चाहता है। बिल्कुल नहीं। इमरान खान भी इसे लेकर सख्त हैं। मगर कट्टरता इतनी प्रबल है कि तमाम विपक्ष के साथ के बावजूद यह सब हो रहा है। सब कह रहे हैं कि यह इस्लाम विरोधी हठ है। जाहिर है, आप तमाम हठीली जनता को मार नहीं सकते?

हम भी तेजी से उसी दिशा में बढ़ रहे हैं। यह कट्टरता पूरे सामाजिक जीवन को नरक बना देगी। यह शांत मन से सोचने की बात है और हम सोचें। हम आवेग से बचें। ऐसा न हो कि लम्हों की खता सदियों तक भुगतनी पडे़।

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  • Web Title:cyber sansar hindustan column on 9th november