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गंभीर काम का वक्त

ंपरीक्षा की तैयारी के लिए सुबह उठकर पढ़ाई किया करो, भारत में छात्रों के लिए मां-बाप की यह सामान्य सलाह होती है। क्या यह सलाह समझदारी भरी है? क्या सुबह की पढ़ाई सबसे बेहतर होती है? हमारा दिमाग मशीन नहीं है। दिन के अलग-अलग समय हमारी प्रतिक्रियाएं एक जैसी नहीं होतीं। भोजन के बाद एकाग्रता घटती है, यह शायद आपने भी महसूस किया होगा। लेकिन हमारी स्नायविक प्रतिक्रियाओं में दोपहर के भोजन के बाद के आलस्य की अपेक्षा कहीं अधिक उतार-चढ़ाव आता है। जापानी श्रमिकों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि सुबह में हम तनाव से भरे काम को बेहतर तरीके से करते हैं। अध्ययन से पता चला कि सुबह के परीक्षण के बाद कर्मचारियों में कार्टिसोल का स्तर बहुत बढ़ गया, लेकिन शाम के परीक्षण के बाद ऐसा नहीं हुआ। जापानी की होक्काइडो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर युजिरो यामानाका कहते हैं, कार्टिसोल हमारे शरीर की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि आप तनाव में हैं, तो घबराहट महसूस न करें, बल्कि आपका दिमाग चौकन्ना रहे और कुछ करने के लिए आपमें ऊर्जा भी रहे। निष्कर्ष यह कि दिन के कार्यों के लिए दिमाग को तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका आपके बिस्तर पर जाने और वहां से उठने के समय से निर्धारित होता है।

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  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 8 february