cyber sansar Hindustan column on 7 may - शाबाश परीक्षकों DA Image

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शाबाश परीक्षकों

 

 

सीबीएसई बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा का रिजल्ट आया है। दो बच्चियों ने 500 में से 499 अंक हासिल किए हैं। वे बधाई की पात्र हैं। मौजूदा शिक्षा व्यवस्था रुलाई की पात्र है। पेपर सेट करने वाले दुहाई के पात्र हैं और कॉपियां जांचने वाले कुटाई के पात्र हैं।
जिस बोर्ड के अंतर्गत पढ़ रहे बच्चे (हम भी उसी बोर्ड से हैं) 500 में से 499 अंक ले आएं, उस बोर्ड के मेंबरान को साइकिल के नीचे कूदकर जान दे देनी चाहिए। जिस पेपर में बच्चों के 100 में से 100 अंक आएं, उसकी प्रश्नपत्र निर्धारण समिति के हर सदस्य के मुंह को खोलकर अंदर थोड़ा-थोड़ा काला हिट स्प्रे करना चाहिए। चुल्लू भर पानी भी इनके लिए ज्यादा होगा। ये अंक बच्चों की प्रतिभा की निशानी कतई नहीं हैं, ये एक पूरी शिक्षा व्यवस्था के दिमागी रूप से दिवालिया हो जाने की निशानी हैं। 
हिंदी के प्रश्नपत्र में चार काव्यांशों के काव्य सौंदर्य पूछे गए थे। इन चारों कवियों की तस्वीरों पर फिर से हार चढ़ा देना चाहिए और उनकी रचनाओं को सिलेबस से बाहर कर देना चाहिए, कि भैया आपकी रचना की अंतिम समीक्षा आ चुकी है और उसके दस में से दस नंबर देकर अन्यतम होने की पुष्टि की जा चुकी है। आपकी रचना से नए विचार उठने की कोई संभावना अब बची नहीं है।

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  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 7 may