cyber sansar Hindustan column on 6 may - जीवन निर्मम है DA Image

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जीवन निर्मम है 

ऑफिस के स्मोकिंग जोन में एक कुलीग थोड़ी उदास थी। वह आज अपने ढाई साल के बच्चे को प्ले स्कूल छोड़कर आई थी। बच्चा अंदर जाने से पहले उससे लिपटकर रोया था। छोटी-छोटी आंखों में मोटे-मोटे आंसू। फिर जब उसने कांच की खिड़की से भीतर देखा, तो सारे बच्चे शोरगुल कर रहे थे और वह अकेला कोने में बैठा सुबक रहा था। खेल रहे बच्चों ने नहीं देखा कि उनके बीच कोई अकेला है, कोई रो रहा है। इस बात पर उसे रोना आ गया, मुझे भी। ऑफिस के वॉशरूम में कई बार चुपके से किसी लड़की के रोने की आवाज आती है। उदासी तब भी आती है, लेकिन ऐसी नहीं, जैसी किसी ढाई साल के बच्चे के अकेले छूट जाने के ख्याल भर से। 
बच्चा मां की गोद से उतरकर दुनिया में जा रहा है। यह शायद जिंदगी का पहला सबक है। जब आप भीड़ में अकेले रो रहे होंगे, कोई नहीं पूछेगा। फिर आप बेआवाज रोना सीखेंगे। जब भीतर सबसे ज्यादा शोर होगा, बाहर कब्र-सा सन्नाटा। और ऐसे भी लोग होंगे जीवन में, जो चाहते तो होंगे, लेकिन आपको बचा नहीं पाएंगे। जैसे वह मां। चाहती तो थी कि दौड़कर कमरे में जाए, बच्चे को उठाए और घर चली जाए। लेकिन उसने कुछ देर देखा और फिर ऑफिस आ गई। यही सच है। जीवन निर्मम है।

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  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 6 may