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आजाद की नजर से पटेल

 

 

इतिहासकारों के बीच 3 जून, 1947 को मौलाना की चुप्पी पर काफी बहस हुई है। उसी रोज माउंटबेटन ने देश को धार्मिक आधार पर बांटने की योजना पेश की थी : कांग्रेस कार्यसमिति ने इस प्लान को पूरी तरह अपना लिया था। तब वहां मौजूद दो मुस्लिम नेताओं में से एक खान अब्दुल गफ्फार खान ने कहा था, ‘आपने हमें भेड़ियों के सामने फेंक दिया है।’ मौलाना आजाद ने कुछ नहीं कहा।... हालांकि अपनी आत्मकथा इंडिया विन्स फ्रीडम  में मौलाना आजाद ने एक बड़े मिथक को ध्वस्त किया था, जिसका आज खूब जिक्र होता है। यह मिथक है कि सरदार पटेल भारत को बंटने नहीं देते, गर नेहरू ने हथियार न डाले होते। पर इंडिया विन्स फ्रीडम  में मौलाना ने पटेल की कड़ी आलोचना की है : ‘मैैं इस बात से हैरान था कि जिन्ना से ज्यादा पटेल पाकिस्तान के समर्थक हो गए थे... लॉर्ड माउंटबेटन की सीन में एंट्री से पहले सरदार पटेल बंटवारे के पक्ष में आधा मन बना चुके थे। वह मान चुके थे कि उनका मुस्लिम लीग के साथ काम करना मुश्किल है। लीग से पीछा छुड़ाने के लिए वह भारत का एक हिस्सा उसे देने को तैयार थे। यह कहना गलत नहीं होगा कि वल्लभभाई पटेल बंटवारे के जनक थे।’ अफसोस की बात है कि मौलाना आजाद जैसे नेता अब भारत की राजनीतिक चेतना से गायब हो गए हैं।

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