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न्याय योजना का दांव

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश के सबसे गरीब परिवारों की न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित करने के लिए सोमवार को जिस ‘न्याय योजना’ की घोषणा की है, उसे केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली अमल किए जाने के काबिल नहीं मानते, जबकि राहुल गांधी का दावा है कि जाने-माने अर्थशास्त्रियों से सलाह-मशविरे के बाद ही इसे तैयार किया गया है। इस योजना पर अमल हो पाएगा या नहीं और इसके लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन जुट पाएंगे या नहीं, यह बहस तो चलती रहेगी, लेकिन इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस घोषणा का लोकसभा चुनाव के नतीजों पर क्या असर पड़ सकता है? क्या यह समूची चुनावी बिसात को पलटने वाला दांव सिद्ध हो सकता है? क्या इससे मतदाता के बहुत अधिक प्रभावित होने की संभावना बनती है?
इन सवालों के अंतिम जवाब तो चुनाव नतीजे ही देंगे... लेकिन यदि कांग्रेस सरकार नहीं भी बना पाती है और भाजपा फिर से केंद्र में सरकार बना पाने में सफल हो जाती है, तब भी अगली सरकार के लिए न्याय योजना की अनदेखी करना अब संभव नहीं होगा। इसलिए लगता है कि कांग्रेस चाहे सत्ता में आए या न आए, न्याय योजना आने वाले दिनों में लागू होकर रहेगी, क्योंकि इसने एकाएक राजनीतिक विमर्श का मिजाज बदल दिया है।

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  • Web Title:cyber sansar hindustan column on 30 march