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गब्बर सिंह की दरियादिली

फिल्मी परदे के दुर्दांत खलनायक अमजद खान असल जिंदगी में कैसे थे, इसे शायद यह किस्सा सबसे अच्छी तरह बयां करता है। यह 1980 के दशक की बात है। शोले  हिट हो चुकी थी और अमजद शिखर पर थे। उसी दौर में उन्होंने एक ऐसी फिल्म साइन की, जिसमें तब के तमाम बडे़ स्टार थे। लेकिन डायरेक्टर की वह पहली फिल्म थी, तो जिसका अंदेशा था, वही हो रहा था। सारे स्टार सेट पर घंटों लेट आते। अपने डॉयलॉग खुद लिखने लगते और कई बार तो अपने लिए नए सीन भी। डायरेक्टर को कोई कुछ समझ ही नहीं रहा था। एक दिन उसका सब्र जवाब दे गया। वह एक कोने में बैठ सुबकने लगा। संयोग से अमजद की नजर उस पर पड़ गई। उन्होंने माजरा पूछा। डायरेक्टर का कहना था कि बहुत हुआ, उसे नहीं करनी यह फिल्म। अमजद ने उसे ढांढस बंधाया और एक फॉर्मूला सुझाया। उन्होंने कहा कि अगले दिन वह सबसे लेट आएंगे और जैसे ही वह सेट पर पहुंचें, वह उन्हें लेट होने के लिए सबके सामने ऊंची आवाज में डांट लगाए। प्लान यह था कि इसके बाद अमजद माफी मांग लेंगे। यही हुआ। यह किस्सा सुनाते हुए अमजद के बेटे शादाब का कहना था कि उसके बाद न कोई स्टार लेट हुआ, न किसी की स्क्रिप्ट बदलने की हिम्मत हुई। फिल्म सुपरहिट हुई और डायरेक्टर भी बड़ा नाम बना। 

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  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 30 july