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असली मुद्दे

 

 

इसमें अब कोई दोराय नहीं कि राहुल गांधी ने आम चुनाव का एजेंडा बदल दिया है। अब यह चुनाव हिंदू बनाम मुसलमान के फर्जी एजेंडे पर न होकर गरीब बनाम अमीर के असली एजेंडे पर होगा। राहुल द्वारा घोषित इनकम गारंटी स्कीम की तफसीलें तो आते-आते आएंगी, लेकिन यह सभी जानते हैं कि इनकम गारंटी योजनाएं लैटिन अमेरिकी देशों में सदी की शुरुआत से ही चल रही हैं। मैक्सिको की ‘अपॉच्र्युनिडैड्स’ और ब्राजील में लूला द सिल्वा की ‘बोलसा फैमीलिया’ योजनाएं गरीबी उन्मूलन और देश की समावेशी आर्थिक प्रगति के लिहाज से कामयाब साबित हुई हैं।
हमारे देश में जब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना कामयाब रही, तो फिर इनकम गारंटी के नाकाम होने की कोई अनिवार्य वजह नहीं दिखती। बेशक इसे शिक्षा और सेहत की गारंटी से जोड़ना होगा, लाभार्थियों की पहचान की एक अचूक व्यवस्था बनानी होगी और भ्रष्टाचार की छूत से बचाकर रखना होगा। लेकिन यह सब तो बाद की बातें हैं। पहली बार में अगर कुछ कमियां रह भी जाएं, तो उन्हें आगे सुधार लिया जाएगा। मगर एक नए जमाने का आगाज तो हो ही गया। सच कहूं, तो बहुत समय बाद गांधीजी का ‘अंतिम आदमी’ हमारे देश में चुनाव के एजेंडे पर आया है और अब उसे हटाया नहीं जा सकता।

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  • Web Title:cyber sansar hindustan column on 28 march