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हेल्थ चेकअप की माया

 

 

भारत में बढ़ रहे स्वास्थ्य-बीमे के साथ रूटीन या सालाना स्वास्थ्य चेकअप के प्रति जागरूकता बढ़ी है। वैज्ञानिक तौर पर यह समझना जरूरी है कि क्या इन हेल्थ चेकअप से उतना या किसी किस्म का लाभ होता भी है? लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं, यह अच्छी बात है। पर कई लोग डॉक्टरों के पास वार्षिक चेकअप के लिए पहुंचने लगे हैं : डॉक्टर साहब, मुआयना कर लें, कहीं कोई रोग तो नहीं पनप रहा? कई लोग पैथोलॉजी लैबों से सीधे पैकेज वाली जांच कराने लगे हैं। न कोई परामर्श, न कोई मशविरा, सीधे टेस्ट का अंबार! कई प्रमाण हैं, जिनके अनुसार वार्षिक हेल्थ चेकअप या रूटीन जांचों से जनसंख्या को कोई स्वास्थ्य लाभ होता नहीं पाया गया। सालाना स्वास्थ्य के मुआयने आपकी सेहत को बेहतर नहीं बनाते, बल्कि जांच में अगर कोई त्रुटि निकल आई (जो कि महत्वपूर्ण नहीं है) तो इसके विपरीत प्रभाव अवश्य पड़ते हैं। लोग रिपोर्टों को लिए घबराए-परेशान डॉक्टरों के चक्कर लगाने लगते हैं। अकारण ही पैसा व ऊर्जा का अनेक बार अपव्यय किया जाता है। हेल्थ चेकअप का यह अंधा चलन जिस देश की नकल है, वह अमेरिका है। वहां हेल्थ केयर एक इंडस्ट्री है। इंसान का इलाज इंडस्ट्री नहीं, इंसानियत करती है। इसलिए भारत को बिना सोचे-समझे अमेरिका न बनाइए।

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  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 27 may