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मरने के विकल्प

एक गुजराती मित्र हैं। पकिया कैलकुलेटिव। उनके कैलेंडर में हर चीज दर्ज है कि कब क्या करना है? मेरे पास आए और कहने लगे कि गाड़ी खराब हो गई है, मेरा एक पैकेट पहुंचा दो, अर्जेंट है। मैंने देखा कि कुछ मेडिकलिया पैकेट है, तो कौतूहल में पूछा कि सब ठीक? उन्होंने कहा कि बिल्कुल फिट हूं, यूं ही जांच करा रहा हूं। मैंने कहा कि अस्पताल में क्यों नहीं करा लेते? उन्होंने बताया कि यह जांच बस इटली में होती है। अब मेरा कौतूहल बढ़ गया कि भला ऐसा क्या मर्ज कि इटली में पता लगेगा? 
उन्होंने बताया कि वे पूरी डीएनए की कुंडली निकाल देते हैं कि जीवन में किस-किस बीमारी की आशंका है। मैंने कहा, ऐसे में तो नींद उड़ ही जाएगी! उन्होंने कहा कि नहीं, मैं उस हिसाब से खान-पान बदल लूंगा, पहले जांच करा लूंगा, बीमारी को होने ही न दूंगा। मुझे रिचर्ड फेनमैन याद आ गए, जो लिखते हैं कि अमेरिका में एक आदमी गड्ढे में गिरना चाहता था, मगर सरकार ने गड्ढे का रास्ता ही बंद कर दिया। उसने शिकायत कर दी कि भला कोई गिरना चाहे, तो गिरे कैसे?... जीवन में मरने के ऑप्शन खुले रखने चाहिए।... ये इटली के कुंडली-निर्माता नए जमाने के पंडित हैं। थूक देखकर बता देते हैं कि कौन मौत के  किस गड्ढे में गिरेगा?

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  • Web Title:cyber sansar hindustan column on 25 march