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अब जो हमें करना है

नतीजा आ गया। अब सब कुछ शांत हो जाएगा, बल्कि पहले से कहीं ज्यादा शांत। पिछले डेढ़ महीने के गुबार से उठी धूल को बैठने में हो सकता है कि कुछ वक्त लगे। निस्तब्धता हालांकि पहले के मुकाबले ज्यादा होगी। बहुत से लोगों की सेहत पर इसका अलग-अलग असर पडे़गा। कुछ लोग बेकाम हो जाएंगे। उन्हें लय में आने में एकाध महीना लगेगा। कई लोग बेराम हो जाएंगे। उन्हें संभलने में एकाध हफ्ता लगेगा। कुछ और लोगों का जनता से भरोसा उठ जाएगा। उन्हें जनता बनने में दो-चार दिन लगेगा। कुछ का जनता पर भरोसा बढ़ जाएगा। उन्हें जाला साफ करने में अगला चुनाव ही काम आएगा। अब हम लोगों को कुछ अच्छे काम करने चाहिए। किताब पढ़नी चाहिए। सिनेमा देखना चाहिए। सोना चाहिए। गाना चाहिए। बच्चों के साथ पढ़ना-खेलना चाहिए। घर में खाना बनाना चाहिए। जिन्हें हमने दुख पहुंचाया और जिनसे हमें दुख पहुंचा इस बीच, उन्हें फोन करके गले लगाना चाहिए। साढ़े पांच सौ लोगों के हित में अपनी जिंदगी गंवाना ठीक नहीं। पांच साल में दो महीना बहुत होता है। हम गीत गाते रहे हैं, गीत गाएंगे। होली, दिवाली, ईद, सब मनाएंगे। जनादेश का सम्मान करेंगे। झगड़ेंगे नहीं। मंजिल की परवाह किए बगैर चलते जाएंगे।  समाज को थोड़ा और समझेंगे। 

 

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  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 24 may