cyber sansar hindustan column on 20 maY - छोटे शहर का सिनेमाघर DA Image

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छोटे शहर का सिनेमाघर

 

बरसों बाद पूर्णिया के रूपवाणी सिनेमा हॉल में फिल्म देखने का मौका मिला। 12वीं की पढ़ाई के दौरान उसमें एक फिल्म देखी थी, उसके बाद कभी नहीं गया। दरअसल, छोटे शहरों के सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की अब बस यादें बची हैं। हम सबकी स्मृति में कोई न कोई सिनेमाघर जरूर होगा। मल्टीप्लेक्स के दौर में भी हमारी स्मृतियों में सिंगल स्क्रीन सिनेमा जिंदा है, लेकिन यह भी सच है कि सिंगल स्क्रीन सिनेमा मर रहा है। अब जब ऐसे कई सिनेमाघर बंद हो चुके हैं, ऐसे में रूपवाणी को नए रूप में देखा, तो लगा कि सिंगल स्क्रीन वाले सिनेमाघरों की भी तस्वीर बदली जा सकती है, बस इच्छाशक्ति की जरूरत है। एक दर्शक के तौर पर इसकी सुविधाएं आकर्षित कर रही हैं। बाजार हमें सिखाता है कि बदलाव ही सत्य है और इस बात को रूपवाणी ने स्वीकार कर लिया है। सिनेमाघर में प्रवेश करते ही इसका इंटीरियर मन मोह लेता है। पूर्णिया बदल रहा है। सोचता हूं कि बदलते समय में जिस अनुशासन में रूपवाणी वक्त की रफ्तार के साथ अपने कदम बढ़ा रहा है, यही रफ्तार यदि शहर पकड़ ले, तो पूर्णिया सचमुच बदल जाएगा। शुक्रिया रूपवाणी। नए दौर में शहर को इतना सुंदर सिनेमाघर देने के लिए। अब सिनेमा देखने सिलीगुड़ी नहीं जाना होगा, आपने पूर्णिया में ही अब शानदार सुविधा दे दी है।

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