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पढ़े-लिखे लोगों की मूच्र्छा

एक स्कूल के प्रिंसिपल ने, जो हिटलर के नाजी कैंप से किसी तरह बच निकला था, लिखा है कि : ‘मेरी आंखों ने वहां जो देखा है, मैं चाहता हूं कि उसे दुनिया में और कोई कभी न देखे...। उस कैंप में मौत वाले गैस चैंबरों को काबिल इंजीनियरों द्वारा बनाया गया था, काबिल और कुशल डॉक्टर वहां बच्चों को जहर देते थे, प्रशिक्षित नर्सें नवजातों को जान से मारती थीं। औरतें और बच्चों को कॉलेज के ग्रेजुएट और डिग्री धारक गोली मारते थे... इसलिए ये सब देखने के बाद अब मैं शिक्षा को लेकर बहुत दुविधा में हूं और आप सबसे विनती करता हूं कि अपने विद्यार्थियों और बच्चों की मदद कीजिए इंसान बनने में। ध्यान दीजिए कि आपकी शिक्षा कहीं उन्हें प्रबुद्ध राक्षस, कुशल मनोरोगी और काबिल पागल तो नहीं बना रही? पढ़ना-लिखना, भाषा, इतिहास, गणित तभी तक जरूरी हैं, जब तक कि वे हमारे विद्यार्थियों में मानव मूल्य और इंसानियत का विकास करें। अगर यह नहीं होता, तो सारी पढ़ाई बेकार है।’ ध्यान से देखिए, जो लोग आपको नफरत भरे मैसेज भेजते हैं वाट्सएप पर, वे सब पढे़-लिखे और बडे़-बडे़ ओहदे पर काम करने वाले लोग हैं।... इसलिए ऐसे मैसेज का रिप्लाई कीजिए और उन्हें बोलिए कि वे आपको अपने जैसा ‘मनोरोगी’ न बनाएं। ऐसे लोगों को उनकी मूच्र्छा से बाहर खींचिए।

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  • Web Title:cyber sansar hindustan column on 1st of september