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पाकिस्तान और इतिहास

क्या पाकिस्तान में जलियांवाला बाग कांड की 100वीं बरसी मनाई गई? बिल्कुल मनाई गई। पाकिस्तान के सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने 13 अप्रैल से एक दिन पहले ट्वीट करके ब्रिटेन से मांग की कि वह जलियांवाला बाग नरसंहार पर माफी मांगे।... अब अगर आप यह कहें कि जलियांवाला बाग के शहीदों की याद में कोई डाक टिकट भी छपा, प्रधानमंत्री ने कोई पैगाम दिया, पाकिस्तानी झंडे को झुकाया गया, तो अर्र्ज है कि हमें और भी जरूरी काम करने हैं। क्या इतना काफी नहीं कि इस नरसंहार की खबर 100 बरस पहले जब लाहौर पहुंची थी, तो पूरे लाहौर में हंगामा हो गया। जिन्ना साहब ने रॉलेट ऐक्ट के खिलाफ लेजिस्लेटिव काउंसिल से इस्तीफा दे दिया। पर हमें तो यह सब इतिहास में बताया ही नहीं गया? मेरे बचपन में जो स्कूली इतिहास पढ़ाया जाता था, उसमें बुद्ध, मौर्य, अशोक, मंगल पांडे, मोहनजोदड़ो और तक्षशिला पाकिस्तानी सभ्यता का हिस्सा थे। फिर एक दिन फैसला हुआ कि पाकिस्तानी इतिहास मोहम्मद बिन कासिम से शुरू होगा और जिया-उल-हक पर खत्म होगा, सारे हीरो मध्य एशिया व मध्य-पूर्व से आयातित होंगे। ऐसे में, बुल्ले शाह, वारिस शाह और दुल्ला भट्टी की जगह ही मुश्किल से निकलती है और आप पूछते हैं, जलियांवाला बाग कांड पाकिस्तानी बच्चों को क्यों नहीं पढ़ाया जाता?

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  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 18 april