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चार्ली चैपलिन की याद

वह विश्व सिनेमा के सबसे बड़े विदूषक और सबसे ज्यादा चाहे गए स्वप्नदर्शी फिल्मकार थे। एक ऐसा महानायक, जो अपने जीवन-काल में ही किंवदंती बने और जिनकी अदाएं उस युग की सबसे लोकप्रिय मिथक हैं। अपने व्यक्तिगत जीवन में बेहद दुखी चार्ली ऐसे अदाकार थे, जो त्रासद से त्रासद परिस्थितियों को एक खुशमिजाज बच्चे की मासूम निगाह से देख सकते थे। वह अपने दुखों पर भी हंस सकते थे और अपनी नाकामियों का मजाक उड़ा सकते थे। प्रथम विश्व युद्ध से बुरी तरह बिखर चुकी दुनिया में कुछ हंसी लेकर आने वाले चार्ली ज्यादातर फिल्मों में मेहनतकश लोगों के संघर्षों को अभिव्यक्ति देने के लिए ट्रैप नाम के जिस किरदार को जीते रहे, वह वस्तुत: उनका अपना ही अभावग्रस्त अतीत था। विश्व सिनेमा पर इतना बड़ा प्रभाव उनके बाद के किसी सिनेमाई शख्सियत ने नहीं छोड़ा। करीब पांच दशक लंबे फिल्मी करियर में चार्ली ने दर्जनों कालजयी फिल्में दीं। एक मासूम सी दुनिया का ख्वाब देखने वाली नीली, उदास और निश्छल आंखों वाले चार्ली चैपलिन की आज जयंती पर हमारी श्रद्धांजलि उनकी आत्मकथा की कुछ पंक्तियों के साथ- ‘जिंदगी को क्लोज-अप में देखोगे, तो यह सरासर ट्रैजेडी नजर आएगी। लॉन्ग शॉट में देखो, तो यह कॉमेडी के सिवा कुछ भी नहीं!’
    

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  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 16 april