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राष्ट्रनिर्माता बाबा साहब  

वह नवंबर की सर्दियों की सुबह थी। 25 नवंबर, 1949 का दिन। देश आजाद हो गया था। संविधान सभा की आखिरी बैठक चल रही थी। संविधान सभा में राय बनी कि मामले पर बहस का समापन बाबा साहब भीमराव आंबेडकर करें और उन सवालों के जवाब दें, जो इस सिलसिले में उठे थे।... बाबा साहब का वह भाषण ऐतिहासिक साबित हुआ। ऐतिहासिक इस मायने में नहीं कि उसमें कोई अभूतपूर्व जोश या विद्वता थी। वह एक संयमित और बहुत संभलकर, बल्कि सहमकर दिया गया भाषण है।... इसमें बाबा साहब आर्थिक व सामाजिक गैर-बराबरी के खात्मे को राष्ट्रीय एजेंडे के रूप में सामने लाते हैं।

उनकी कामना थी कि सांविधानिक संस्थाएं वंचित लोगों के लिए अवसरों का रास्ता खोले और उन्हें लोकतंत्र में हिस्सेदार बनाएं। राष्ट्रीय एकता के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए संविधान के मूल अधिकारों के अध्याय में अवसरों की समानता के सिद्धांत को स्वीकार करते हुए भी विशेष अधिकार का प्रावधान किया गया। आरक्षण का सिद्धांत वहीं से आता है।... आरक्षण का मकसद यह है कि वंचित जातियों को महसूस हो कि देश में मौजूद अवसरों में उनका भी हिस्सा है और देश चलाने में उनका भी योगदान है। इसलिए संविधान सबका ख्याल रखता हुआ नजर आता है।
 

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  • Web Title:cyber sansar hindustan column on 14 april