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डॉक्टरों के संकट

डॉक्टरों की समस्या बहुआयामी रूप से बढ़ती जा रही है। एक पुरुष के दिमाग की एक ग्रंथि बढ़ी नजर आई, कुछ रक्त जांच करवाए, ठीक निकले। फिर यूं ही साल भर बाद बुलवा लिया कि एमआरआई कर लें। तब भी वैसी ही। मैंने पुराने कागजात पलटे, और उनके पारिवारिक चिकित्सक से बात की। उन्होंने कहा कि वह पहले स्त्री थे, अब पुरुष बन गए हैं। मैंने कहा कि स्त्री के हिसाब से तो ग्रंथि ठीक है, मैं खामख्वाह मगजमारी कर रहा था। अपने विभाग के फॉर्म में भी सुझाव दिया कि यह बात जोड़ दी जाए कि मूल लिंग ही लिखना है, बाद में लिंग बदला, तो दोनों जरूर लिखें। 
एक बार भारत के नामी तेज गेंदबाज ने बेंगलुरु में रक्त का सैंपल भेजा कि फलां प्रसाद नाम है, फीमेल है। जांच हुई, तो सारी रिपोर्ट गड़बड़। हमने सूचित किया। उनकी पत्नी लड़ने आ गईं कि फलां प्रसाद उनके कुत्ते का नाम है, हमने रिपोर्ट गलत बनाई। लैब असिस्टेंट भिड़ गए कि मैडम, कुत्ते के खून से हमारी मशीन खराब हो जाती तो? खैर हमने यह कहते हुए मामला संभाला कि गलती हमारी है। 
लेकिन सवाल यह है कि फॉर्म में ऐसे कितने कॉलम बनते रहेंगे? और कुछ पुराने ढर्रे के लोग बुरा भी मान जाएंगे, अगर उनसे पूछा जाए कि आदमी हैं या पशु? वाकई पुरुष हैं या बाद में बने?

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  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 13 may