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मुश्किल है रास्ता

‘इंफोसिस’ अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज नैस्डैक में लिस्ट होने वाली पहली भारतीय कंपनी है। कंपनी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली टीम के अग्रणी थे फणीश मूर्ति। लेकिन अमेरिका में फणीश की सेक्रेटरी रेका मैक्सिमोविच ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटा दिया। फणीश ताकतवर थे, इंफोसिस की जरूरत भी, पर इंफोसिस प्रमुख एनआर नारायणमूर्ति ने बिना वक्त गंवाए उन्हें न सिर्फ नौकरी से निकाला, बल्कि मैक्सिमोविच को 30 लाख डॉलर का हर्जाना देते हुए मामले को आउट ऑफ कोर्ट सेटल भी किया।

उम्मीद थी कि महिलाओं के यौन उत्पीड़न को लेकर कंपनियां पहले से अधिक संवेदनशील हो जाएंगी, पर खबर आई है कि गूगल ने 2013 में एंड्रॉयड तकनीक के जनक और यौन उत्पीड़न के अभियुक्त एंडी रुबीन को आरोप साबित होने के बावजूद कंपनी छोड़ने के एवज में नौ करोड़ डॉलर दिया था। चार दिन पहले दुनिया भर में ‘गूगल’ के हजारों कर्मचारी कंपनी के रवैये के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। जब अमेरिका जैसे देश में गूगल जैसी कंपनी मेें औरतों को अपने शोषण के खिलाफ एकजुट होने में इतना वक्त लगता है, तो बाकी देशों में काम कर रही औरतों से क्या उम्मीद लगाई जाए?
 

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