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आत्म-मुग्ध पीढ़ी

भूमंडलीकरण की केंद्रीय विशेषता है- आत्म-मुग्धता, आत्म-हनन और आत्म-व्यस्तता। सन 1990-91 के बाद से युवाओं में यह प्रवृत्ति तेजी से पैदा हुई है। इसने उसे सामाजिक सरोकारों से काटा है। पहले यह प्रवृत्ति उच्च वर्ग में थी, लेकिन भूमंडलीकरण के बाद से इस प्रवृत्ति ने निचले वर्गों में पैर पसारने आरंभ कर दिए। 
आत्म-मुग्ध भाव की विशेषता यह है कि आप स्वयं को जानने की कोशिश नहीं करते। खुद को न जानने के कारण व्यक्ति के अंदर अन्य को जानने की इच्छा भी खत्म हो जाती है। फलत: ये युवा अन्य की मदद नहीं कर पाते। वे निजी जीवन में व्यस्त रहते हैं। निज से परे कोई संसार है, जिसे जानना चाहिए, उसको ये युवा संबोधित ही नहीं करते। यह ऐसा युवा है, जो अपने अलावा किसी में दिलचस्पी नहीं लेता।
अमेरिका में इस तरह के युवाओं की एक नागरिकता परीक्षा ली गई। 30 लाख से ज्यादा आप्रवासी युवाओं ने इसमें हिस्सा लिया। इस परीक्षा को 92 प्रतिशत युवाओं ने पास किया। इन उत्तीर्ण नौजवानों में 29 फीसदी को अमेरिका के उप-राष्ट्रपति का नाम तक नहीं मालूम था। 43 फीसदी युवा नागरिक अधिकारों को परिभाषित करने में असमर्थ रहे, तो 67 प्रतिशत नहीं जानते थे कि वे जिस आर्थिक व्यवस्था में रहते हैं, उसे पूंजीवाद कहते हैं। 

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  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 12 june