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बदलाव का वक्त

विराट कोहली को कप्तानी की बारीकी सिखाते कितने साल हो गए? अब उनसे कहा जाना चाहिए कि वह केवल बल्लेबाजी पर ध्यान दें। उनकी जगह रोहित शर्मा या जडेजा को कप्तान बना देना चाहिए। ये दोनों टेस्ट और वनडे फॉरमेट के अलग-अलग कप्तान बनाए जा सकते हैं। धौनी को जाना ही होगा... वह अब भी जडेजा के बराबर दौड़ सकते हैं, अब भी पंत से बेहतर फुर्ती के साथ विकेट के पीछे मोर्चा ले सकते हैं, लेकिन वह अपने अतीत को वापस पाने की हताश कोशिश करते हुए भी दिखते हैं। किसी की सीमा ही स्ट्रीट लैंप छूने की हो और वह फुर्ती से उछलकर उसे छू ले, तो तालियां बजती हैं, मगर कोई चांद छूकर लौटा हो और दोबारा कोशिश में फिसल-फिसल जा रहा हो, तो तालियां नहीं बजतीं। वैसे भी और कितने महीने रुक सकेंगे धौनी? बेहतर यही होगा कि इस हार की सामूहिक निराशा को वह अपने रिटायरमेंट की अंजुरी में लेकर पी जाएं। उनके जाने के साथ यह टीम पूरी तरह मेरे बेटे की हो जाएगी। वैसे ही, जैसे गावस्कर और कपिल के जाने के साथ वह टीम पापा के रेडियो से निकलकर मेरे टीवी सेट में आ गई थी। जैसे मैं गावस्कर, श्रीकांत, कपिल, किरमानी, अमरनाथ को नहीं भूला, वैसे ही ये बच्चे सचिन, सौरव, द्रविड़, सहवाग, युवराज, जहीर और धौनी को नहीं भूल पाएंगे।

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  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 12 july