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इनकी मौत पर कौन रोएगा  

राजधानी दिल्ली के मोतीनगर इलाके में सीवर की सफाई करने अंदर उतरे चार मजदूरों की इहलीला समाप्त हो गई और एक अब भी अस्पताल में भर्ती है। उसकी भी स्थिति खराब है। यह समझ से परे है कि बार-बार ऐसी त्रासदियां हो रही हैं, और इसे रोकने के उपाए नहीं किए जाते। वे गरीब मजदूर थे, उनकी ऐसी दर्दनाक मौत पर कौन आंसू बहाए? कौन एनजीओ उनके लिए सामने आए? कोई राजनीतिक दल उस पर बयान तक क्यों जारी करे? दिल्ली के सारे नगर निगम भाजपा के हाथों में हैं। प्रधानमंत्री स्वच्छता मिशन चला रहे हैं। क्या उसमें दिल्ली के निगम शामिल नहीं हैं? हैं, तो फिर सीवर में उतरने वाले मजदूरों को सुरक्षा वस्त्र क्यों नहीं दिए जाते? इसके लिए बाकायदा अंतरराष्ट्रीय मापदंड बना है। इस संदर्भ में दिल्ली उच्च न्यायालय का सख्त आदेश है। अगर नगर निगम उनका पालन नहीं करते, तो ऐसी दिल दहला देने वाली मौतों को हत्या मानकर संबंधित नेताओं, अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा क्यों न चले?

बहरहाल, मृत मजदूरों के परिवारों की तलाश कर उन्हें फौरन उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही, आगे से सीवर में उतरने वालों के लिए बीमा की व्यवस्था हो। अगर अभी तक सुरक्षा वस्त्र एवं मास्क पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं, तो अविलंब ऐसा किया जाए।

 

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  • Web Title:cyber sansar hindustan column on 11 september