DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

तमिल प्रदेश में हिंदी

बच्चे किसी यू-ट्यूब चैनल पर्र ंहदी कार्टून कथाएं देखते हैं। उसमें जो आवाज होती है, उसे सुनकर यह स्पष्ट लगता है कि यह कोई दक्षिण भारतीय आवाज है। वे महाप्राण (थ, ध) नहीं कहते। जैसे, ‘एक राजा ता। वह बहूत दुष्ट ता।’ मैंने इसकी तफ्तीश की, तो पता लगा कि भारत का सबसे संगठित डबिंग उद्योग चेन्नई में है। वहां कई डबिंग आर्टिस्ट हैं, जो हिंदी में डब करते हैं, बल्कि लगभग सभी दक्षिण भारतीय फिल्में हिंदी में डब होती हैं। अंग्रेजी फिल्मों का डब मुंबई के कलाकार करते रहे हैं, लेकिन उनका भी एक बड़ा हिस्सा दक्खिन में ही डब होता है।
आपने अगर मणिरत्नम की फिल्में या ए आर रहमान के गीत सुने हों, तो उनमें तत्सम शब्दों का बहुत उपयोग है। उर्वशी-उर्वशी  गीत की पंक्ति है नजर के मिल जाने से शील तो भंग न होगा।  यह किसी उत्तर भारतीय का अनुवाद नहीं। ऐसे गीत बॉलीवुड में कभी हुए ही नहीं। बाकी बातें तो छोड़िए, नायिका को आधुनिक हिंदी गीत में उर्वशी संबोधन ही नहीं मिलेगा।
तो तमिल व्यावसायिक और संगठित रूप से हिंदी का प्रयोग करते रहे हैं, बल्कि हिंदी संवाद में उनकी अमूल्य भूमिका है। जो गैप नजर आता है, वह इसलिए कि उत्तर में कोई डबिंग आर्टिस्ट नहीं, जो टूटी-फूटी ही सही, हिंदी से तमिल में डब करे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 10 june