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बेमिसाल नाडिया 

मदर इंडिया, अंदाज  और हमराज  जैसी कई फिल्में हैं, जिनको भारतीय नारी की महानता दिखाने के लिए जाना जाता है, लेकिन इन फिल्मों ने भारतीय नारियों के लिए और मुश्किलें पैदा कीं। कहीं न कहीं वे यह संदेश भी देती थीं कि स्त्रियों का सिर्फ इंसान होना अयोग्यता है, बल्कि उनकी न्यूनतम योग्यता देवी बने रहना है। सो वे सहती रहें और त्याग करती रहें। ऐसे में, उनके लिए ‘एंग्री’ होने का सवाल ही पैदा नहीं होता था। एंग्री होना सिर्फ यंग मैन के हिस्से आता था। व्यवस्था और समाज सुधारने के लिए हमारे हीरो को गुस्सा आने में भी 40 साल लगे। लेकिन अमिताभ बच्चन को गुस्सा आने से करीब 40 साल पहले ही किसी ने सिर्फ हंटर लेकर असामाजिक तत्वों को तत्काल सजा देना शुरू कर दिया था। और यह हंटरवाली थीं मेरी एन एवांस, जिन्हें दुनिया नाडिया के नाम से जानती है। नाडिया ऑस्ट्रेलिया से भारत आई थीं। उन्होंने तकरीबन 50 फिल्मों में काम किया, जिनमें एक तरफ उन्होंने जमींदारों से लड़ाई की, तो दूसरी ओर औरतों की शिक्षा एवं आजादी की बात की। भारत में भुला दिए जाने और विदेश में याद किए जाने के बाद वह एक बार फिर वापस भारत आ रही हैं। विशाल भारद्वाज की आने वाली फिल्म रंगून  में कंगना रनौट हंटरवाली के किरदार में दिखेंगी। 

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  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 10 january