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हंगरी में फिर ओरबान 

एंजला मर्केल और विक्टर ओरबान में क्या समानता है? सिर्फ एक कि दोनों चौथे कार्यकाल के लिए चुने गए हैं, लेकिन मर्केल के विपरीत ओरबान एकछत्र राज कर सकते हैं। उन्हें गठबंधन की जरूरत नहीं। असल में, ओरबान की जीत मर्केल के लिए चिंता की वजह है। ओरबान का हंगरी 1945 के बाद यूरोप में उदारवादी सहमति को विदा कहने का मॉडल है। यह लोकतांत्रिक वैधता वाला एकदलीय शासन है। ओरबान खुद कहते हैं, ‘एक अनुदारवादी लोकतंत्र।’ ओरबानवाद एक करोड़ की आबादी वाले हंगरी की सीमा से बाहर भी लोकप्रिय है। पोलैंड की सत्ताधारी पीआईएस पार्टी उसकी नकल कर रही है। चेक गणतंत्र व स्लोवाकिया भी राज्य के पुनर्गठन के मॉडल का खुलेआम समर्थन करते हैं। ये चारों देश विजेग्राद संघ में शामिल हैं, जो यूरोपीय संघ के नेतृत्व का विरोधी है। ओरबान यूरोपीय संघ के पूरब में विस्तार के बाद से उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। यूरोपीय संघ के पैमाने पर वह एकदलीय शासन के प्रणेता हैं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह पुतिन, एर्दोगन और ट्रंप जैसे नई लोकतांत्रिक तानाशाही के समर्थक हैं। कुल मिलाकर, उस सबका विरोधी, जो दशकों से यूरोप की एकता की वजह रहा  है- लोकतंत्र, अभिव्यक्ति व मीडिया की स्वतंत्रता और कानून का शासन।

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  • Web Title:cyber sansar Hindustan column on 10 april