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मिठाई और मोटापा

आपा खो देने से भी मोटापा चिर स्थाई होने की ओर बढ़ता जाता है। बहुत दिनों से बहुत कुछ कंट्रोल करने की जुगत में था। मीठा कम, चावल कम, शाम को ‘व्यय-आम’ और पैक्ड फूड से दूरी। इस तरह की छोटी-छोटी चीजों से अपना वन पैक एब कम करने की कोशिश में था। लेकिन परसों त्योहार आ गया। घनघोर रक्षाबंधन वाली फीलिंग आ गई। मिठाई के डिब्बे में चपटे गुलाब जामुन और मलाई चमचम का राष्ट्रवादी रंग देखकर मुंह में बादल फट गया। बादल फटने के बाद भी मैंने जैसे-तैसे अपने मुंह का ओवरफ्लो रोक रखा था। मगर शाम को बुआ जी ने बाल्टु भरकर खीर भेज दी। 

फिर क्या, ओवरफ्लो की वजह से डैम फट गया और मुंह का पानी दाढ़ी के बीच से अपना रास्ता बनाते हुए बह चला। शाम को डोंघा भरकर खीर खाई, खाना खाने से पहले। अगली सुबह उठते ही बची हुई खीर को डायरेक्ट बाल्टु में घुसकर चट किया। अब ऐसी त्योहारी परिस्थिति में बंदा अपना आपा न खोए, तो भला क्या करे? अपना मोटापा उस किराएदार की तरह हो गया है, जो घर खाली करने की बजाय बाकी के कमरों पर भी कब्जा किए जा रहा है। मैं पतला तो होना चाहता हूं, मगर इन त्योहारों का सत्यानाश जाए... जलते हैं सब के सब त्योहार मुझसे।

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  • Web Title:cyber sansaar article in Hindustan on 28 august