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अफसर और सियासत

रायपुर के जिलाधिकारी ओपी चौधरी ने भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर बीजेपी ज्वॉइन कर ली है। चौधरी के इस फैसले का इस्तेमाल इस बहस के लिए होना चाहिए कि सरकारी अफसरों को राजनीति में शामिल होने का मौका मिले। भारतीय लोकतंत्र का एक स्तंभ नौकरशाही की तटस्थता है, पर अगर देश भर के राजनीतिक परिदृश्य को देखा जाए, तो शायद ही कहीं यह तटस्थता दिखती है। सरकारी नौकरी से राजनीति में जाने के युवा अधिकारी चौधरी जैसे मामले कम हैं, लेकिन इतने कम भी नहीं कि उन्हें नजरंदाज किया जाए। सरकारी कर्मचारियों के राजनीतिक दलों में शामिल होने के कई फायदे हैं। राजनीतिक दलों को प्रशिक्षित व प्रशासनिक कुशलता वाले सदस्य मिलेंगे। सरकारी अधिकारी यदि पार्टियों के सदस्य बन सके, तो वे बिना डर के या तो सरकार के काम का समर्थन कर पाएंगे या उसका विरोध कर पाएंगे और अपने पद की गोपनीयता के साए में नहीं छिपेंगे। सरकारी अधिकारी पढे़-लिखे इंसान हैं। उनकी अपनी राजनीतिक सोच होती है, जिसे वे निजी बातचीत में अभिव्यक्त भी करते हैं। उनकी भागीदारी से राजनीति को समतामूलक बनाना संभव होगा। राजनीति से लोगों का मोहभंग खत्म होगा, उससे डर खत्म होगा और नए लोग राजनीति में आएंगे।

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  • Web Title:cyber sansaar article in HIndustan on 03 september