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पैरा गेम्स चैंपियनों का यशगान

हम भारतीय खेलों में एक नए अध्याय के शिखर पर विराजमान हैं। खेलों की सुंदरता हमेशा बेहद मनमोहक होती है। मानवीय धैर्य और दक्षता को व्यक्त करने के अवसरों और मंचों का सृजन करना प्रधानमंत्री नरेन्द्र...

पैरा गेम्स चैंपियनों का यशगान
Pankaj Tomarअनुराग सिंह ठाकुर, केंद्रीय युवा, खेल एवं सूचना-प्रसारण मंत्रीSun, 10 Dec 2023 11:20 PM
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हम भारतीय खेलों में एक नए अध्याय के शिखर पर विराजमान हैं। खेलों की सुंदरता हमेशा बेहद मनमोहक होती है। मानवीय धैर्य और दक्षता को व्यक्त करने के अवसरों और मंचों का सृजन करना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उत्साहपूर्ण, सशक्त और उल्लासपूर्ण राष्ट्र के विजन का केंद्र रहा है और खेलो इंडिया पैरा गेम्स का आरंभ समावेशी समाज का निर्माण करने और उसे मजबूती प्रदान करने की दिशा में उठाया गया एक अनुपम कदम है। दिल्ली में तीन अलग-अलग स्थानों पर सप्ताह भर चलने वाले खेलो इंडिया पैरा गेम्स में छिपी हुई भारतीय प्रतिभाओं को निखारने में मदद मिलेगी। 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 1400 से अधिक पैरा एथलीटों को दिल्ली में एकत्रित होते देखना अद्भुत है। सर्विसेज स्पोर्ट्स बोर्ड के एथलीटों की उपस्थिति निश्चित रूप से आरंभिक खेलों को एक अतिरिक्त आयाम देगी। यह सिर्फ एक आयोजन भर नहीं है, एक भारतीय प्रतिभाओं के लिए एक मौका है। 

2016 में शुरू हुआ, खेलो इंडिया भारत को खेल राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर करने का माननीय प्रधानमंत्री का विजन है। इस अवधारणा का जन्म 2014 में वर्तमान सरकार के अस्तित्व में आने के बाद हुआ। इसके परिणामस्वरूप देश के कोने-कोने से लगभग 3,000 खिलाड़ियों की पहचान की गई है, जिनमें से अनेक ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और देश के लिए पदक जीते हैं। खेलो इंडिया पैरा गेम्स के उद्देश्य समान हैं, खिलाड़ियों की पहचान करना, उनको प्रोत्साहित करना और चैंपियनों तैयार करना है।

भारत में खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन का महत्वपूर्ण कारण उन्हें मिलने वाली सहायता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी भी हमारे खिलाड़ियों से दूर नहीं रहे हैं। उन्होंने हमारे खिलाड़ियों की हर उपलब्धि को बड़े स्नेह से संजोया है। यह कहना बेमानी होगा कि खिलाड़ियों के साथ उनकी बातचीत ने उनकी प्रेरणा के स्तर को बढ़ा दिया है। यह स्वाभाविक है, जब स्वयं प्रधानमंत्री आपकी हौसला-अफजाई करते हैं, तो आपका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है।

वास्तव में, हाल के दिनों में भारत की खेल आकांक्षाओं में कई गुनी वृद्धि हुई है। खेलो इंडिया निश्चित रूप से गेमचेंजर रहा है। इसने खेलों को न केवल जन-जन तक पहुंचाया है, बल्कि देश भर में फैली अपनी कई अकादमियों और योजनाओं के माध्यम से एक वैज्ञानिक और आधुनिक दृष्टिकोण भी विकसित किया है। हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि हमारे खेल कार्यक्रम खेलों में महिलाओं की भागीदारी पर अत्यधिक जोर देते हैं और भारत को इस बात का भी गर्व है कि पीवी सिंधु, लवलीना बोरगोहेन, मनु भाकर और मीराबाई चानू जैसे हमारे चैंपियन अंतरराष्ट्रीय सफलता के मामले में अपने पुरुष समकक्ष जैसे ही प्रसिद्ध हैं। टोक्यो ओलंपिक का एक मुख्य आकर्षण था, ग्रीष्मकालीन खेलों में पुरुष और महिला एथलीटों की समान भागीदारी। खेलो इंडिया गेम्स में, निशानेबाजी, बैडमिंटन और तीरंदाजी सहित सात खेल विधाओं में पुरुष और महिला खिलाड़ियों का समान प्रतिनिधित्व होगा।

खेलों में महिलाओं पर विशेष ध्यान, सरकार की प्राथमिकता रही है। खेलो इंडिया महिला लीग, युवा एवं खेल मंत्रालय द्वारा की गई पहलों का प्रमाण है। महिला लीग में 14 खेल विधाओं में 240 से अधिक स्पद्र्धाएं आयोजित की गईं, जिनमें विभिन्न आयु वर्गों के 23,000 से अधिक महिला एथलीटों ने भाग लिया। यह बताना प्रासंगिक है कि खेलो इंडिया पैरा गेम्स भी उन पहलों के अनुरूप हैं, जिन्हें सरकार द्वारा दिव्यांगजनों को मुख्यधारा के जीवन में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए शुरू किया गया है। व्यावसायिक और शैक्षिक प्रशिक्षण, व्यवसाय के लिए रियायती ऋण जैसी पहलों से वित्तीय और सामाजिक, दोनों तरह का सशक्तीकरण हुआ है। खेलो इंडिया पैरा गेम्स इन पहलों को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है। तथ्यों और आंकड़ों से बेहतर सफलता की कोई परिभाषा नहीं हो सकती। एशियाई पैरा गेम्स में कुल 303 एथलीटों (191 पुरुष और 112 महिलाएं) ने 17 खेल विधाओं में प्रतिस्पद्र्धा की। जकार्ता में 2018 एशियाई पैरा गेम्स में जीते गए पदकों में हुई 54 प्रतिशत की वृद्धि हमें विश्वास दिलाती है कि जहां तक हमारी योजना और बजट का सवाल है, हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

प्रथम खेलो इंडिया पैरा गेम्स के आयोजन का समय बिल्कुल सही इसलिए भी है, क्योंकि हम अपने अंतरराष्ट्रीय पैरा स्टार की महान उपलब्धि का उत्सव मना सकते हैं। सांख्यिकीय दृष्टिकोण से, पैरा एथलीटों ने इतना तो साबित कर ही दिया है कि अंतरराष्ट्रीय सफलता के मामले में वे बेहद सक्षम हैं। नीरज चोपड़ा द्वारा टोक्यो में ओलंपिक भाला फेंकने की स्पद्र्धा में स्वर्ण पदक जीतने और भारत को गौरवान्वित करने से बहुत पहले, देवेंद्र झाझरिया ने भाला फेंकने की स्पद्र्धा में एक नहीं, बल्कि दो पैरालंपिक स्वर्ण पदक जीते थे। झाझरिया जैसे व्यक्ति इस बात की प्रेरणा के प्रतीक हैं कि कैसे असंभव को संभव किया जा सकता है।

इतना ही नहीं, एयर राइफल शूटर अवनि लेखरा टोक्यो के आयोजित गेम्स में दो बार पदक जीत चुकी हैं। उन्होंने पहले ही इस साल के अंत में पेरिस ओलंपिक में हमारे नियमित निशानेबाजों के लिए अनुकरणीय मानदंड स्थापित कर दिया है। हम अपने पैरा बैडमिंटन सितारों को कैसे भूल सकते हैं। प्रमोद भगत, कृष्णा नागर, मानसी जोशी ये उन प्रमुख नामों में शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक ने शारीरिक चुनौतियों से ऊपर उठकर भारत के लिए ख्याति अर्जित की है।

पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने अपनी उपलब्धियों से दुनिया का लोहा मनवाया है। सबसे आश्चर्यजनक यह है कि बिना हाथ वाली 16 वर्षीया यह एथलीट एशियाई पैरा गेम्स में अपने दो स्वर्ण और एक रजत से संतुष्ट नहीं हैं और पेरिस में भारत का नाम रोशन करना चाहती हैं। यह उनके दृढ़ विश्वास और अदम्य साहस से अवगत कराता है। खेलो इंडिया पैरा गेम्स में प्रतिभागियों को निश्चित रूप से प्रेरणा की कमी नहीं होगी।
पैरा गेम्स केवल प्रतिस्पद्र्धा के बारे में नहीं हैं। यह केवल पदक जीतने के बारे में नहीं है। वास्तव में, इस सप्ताह भाग लेने वाला प्रत्येक एथलीट पहले से ही विजेता है। एक शारीरिक चुनौती पर विजय पाना और आगे बढ़कर सामने वाले प्रतियोगी की आंखों में आंखें डालकर देखने, अपने आप में अद्भुत है। पैरा गेम्स मानवीय गरिमा का उत्सव हैं और खेलो इंडिया पैरा गेम्स भी उसी तरह ही हैं।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं) 

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