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निचले स्तर पर राजनीति

बीते कुछ वर्षों में देश की राजनीति का स्तर बहुत गिरा है। पहले भी नेतागण एक-दूसरे पर तंज कसा करते थे, लेकिन अब यह अधिक व्यक्तिगत हो गया है। इसके अलावा वे अन्य बचकानी हरकतें भी कर रहे हैं। संसद जैसी जगह पर कागज के हवाई जहाज उड़ा रहे हैं, जैसे कि वे प्राथमिक विद्यालय के बच्चे हों। संसद देश की सबसे बड़ी पंचायत होती है, जहां से देश के बेहतर संचालन के लिए नियम-कानून गढ़े जाते हैं। वहां सांसदों द्वारा इस तरह की हरकतें करना राष्ट्र के लिए शर्मनाक है। हालांकि राज्यों का भी यही हाल है, जिनकी विधानसभाओं में कुरसियां चलने और हाथापाई की खबरें वक्त-बेवक्त आती रहती हैं। ऐसे में, यह संवेदनशील लोगों की जिम्मेदारी है कि वे अच्छे प्रतिनिधियों को ही संसद या विधानसभाओं में भेजें। धर्म और जाति के नाम पर नहीं, बल्कि उसकी सोच के आधार पर उम्मीदवारों की दावेदारी आंकी जाए।

    विकास वर्मा, मोदीनगर, गाजियाबाद


लुभाता पुस्तक मेला 

हमारे देश में समय-समय पर पुस्तक मेले का आयोजन किया जाता रहा है। अभी दिल्ली में पुस्तकों की ऐसी ही महफिल सजी है। इन पुस्तक मेलों में भारी भीड़ का उमड़ना इस बात का संकेत है कि समाज में किताबों की लोकप्रियता घटी नहीं है, बल्कि बढ़ती जा रही है। आम सोच अब भी यही है कि बिना पुस्तक के किसी भी व्यक्ति का ज्ञान अधूरा है। पुस्तक के बिना कोई ढंग की शिक्षा नहीं ले सकता। आज के आधुनिक युग में पुस्तकों के साथ-साथ सब कुछ कंप्यूटराइज्ड जरूर होता जा रहा है, लेकिन शिक्षा के बदलते रूप में भी लाइब्रेरी का अपना महत्व है। दुखद है कि अपने देश में आज भी पर्याप्त संख्या में पुस्तकालय नहीं हैं। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए, खास तौर से गांवों पर यदि ध्यान दिया जाता है, तो अच्छे नतीजे आ सकते हैं। 

    विजय कुमार धनिया, नई दिल्ली


बेवजह का हंगामा

लोकसभा में पिछले एक सप्ताह से कामकाज कम और हंगामा अधिक हो रहा है। इस हंगामे के चलते कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित नहीं हो पा रहे हैं। हंगामा इतना बढ़ गया है कि सदन की कार्यवाही लगातार स्थगित करनी पड़ रही है। सांसद कागज के हवाई जहाज बनाकर स्पीकर की ओर उछाल रहे हैं। सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के लिए कुछ सांसदों को निलंबित किया गया है, लेकिन इस तरह की हंगामेबाजी लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है। संसद एक विधायी संस्था है, जहां जनहित संबंधी विधान बनाए जाते हैं। यदि सदन में इस तरह तमाशा होता रहेगा, तो न केवल महत्वपूर्ण कार्य छूट जाएंगे, बल्कि जनता पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सांसदों को सदन की मर्यादा का पालन करना चाहिए। वे संसद में व्यवधान डालने के लिए नहीं, बल्कि सुचारू रूप से उसके संचालन के लिए वहां जनता द्वारा भेजे जाते हैं।

    शरद कुमार बरनी
बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश


देसी ज्ञान को बढ़ावा 

पारंपरिक ज्ञान को बचाए रखने के लिए स्कूलों में विज्ञान, कला और वाणिज्य संकाय की तरह वेद संकाय भी जोड़ा गया है। एनआईओएस ने बहुत बेहतर तरीके से इसका कोर्स तैयार किया है। वहां अब 10वीं और 12वीं कक्षाओं में वेद संकाय से विद्यार्थी वेद और संस्कृत का ज्ञान ले सकेंगे। वेद का ज्ञान होना जरूरी है, क्योंकि यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है, और एक भारतीय नागरिक होने के नाते हमें अपनी परंपराओं का ज्ञान होना भी चाहिए। इसीलिए इस पहल का स्वागत होना चाहिए। इससे वेद के ज्ञाताओं के सामने नए रास्ते भी खुलेंगे और वे अपने ज्ञान को स्कूली स्तरों पर बांट सकेंगे। वाकई, कोई भी ज्ञान तभी दिलों में जगह बनाता है, जब उसके साथ रोजगार जुड़ता है। वेद के साथ अब ऐसा ही होगा। 
    
विविधा
 दिल्ली विश्वविद्यालय
 

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