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पटाखों से प्रदूषण

कुछ समय की अपनी खुशी के लिए दूसरों को परेशानी देना या वातावरण को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं। इस दिवाली पर पटाखे कम से कम या बिल्कुल न चलाने की आवाजें उठ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसके लिए एक समय-सीमा तय कर दी है। कोर्ट के इस फैसले पर सबके अपने-अपने विचार हैं। मगर यह हमें जरूर समझना चाहिए कि दिवाली पर भारी मात्रा में इस्तेमाल किए जाने वाले पटाखे वायु प्रदूषण ही नहीं फैलाते, बहुत ज्यादा ध्वनि प्रदूषण भी करते हैं। और यह प्रदूषण भी कुछ लोगों, खासतौर से रोगियों के लिए मुसीबत बनता है। ध्वनि प्रदूषण इंसान को शारीरिक और मानसिक विकार तो देता ही है, जीव-जंतुओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। बेशक दिवाली पर एक या दो दिन पटाखे न चलाने से ही वायु प्रदूषण या ध्वनि प्रदूषण खत्म होने वाला नहीं है, मगर इन पर नियंत्रण करने के लिए हमें वे तमाम प्रयास करने ही होंगे, जो किए जाने जरूरी हैं। 
राजेश कुमार चौहान, जालंधर
raju09023693142@gmail.com

दो बड़ी सौगात
राजधानी दिल्ली को सिग्नेचर ब्रिज और गुजरात को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसी दो बड़ी सौगातें मिली हैं। इनसे देश को कुछ लाभ की आशा है। सिग्नेचर ब्रिज की शुरुआत शीला सरकार ने लगभग चौदह वर्ष पूर्व की थी, जो बहुत बड़ी धनराशि और लंबे समय के बाद अब पूरी हो पाई है, हालांकि जनता का यह भी मानना है कि इतनी बड़ी धनराशि और समय में तो देश और दिल्ली को न जाने कितने जरूरी ब्रिज मिल जाते, जिनसे जाम और हादसों से बचा जा सकता था। इसी तरह, लौह पुरुष सरदार पटेल की विश्व में सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी यानी एकता की मूर्ति गुजरात के साथ पूरे देश के लिए शोभा व सम्मान की बात है, बशर्ते इसके लिए ली गई किसानों की जमीन, प्रभावित जनता और भावी दर्शकों के साथ भी उचित न्याय हो। इससे कुछ रोजगार के साथ राज्य व देश को अच्छी आय होगी। इसके आस-पास अन्य कई दर्शनीय और आवासीय स्थलों से भी इसका महत्व बढ़ेगा। लेकिन जरूरी यह भी है कि इसका टिकट तर्कसंगत हो।
वेद मामूरपुर, नरेला
vedmamurpur@gmail.com

गैस चैंबर बनी दिल्ली
दिल्ली को दिल वालों की दिल्ली कहा जाता है, लेकिन आज इसका रूप ही बदल दिया गया है। पूरी दिल्ली अब गैस चैंबर में बदल गई है। यह चिंता की बात है। यहां प्रदूषण का स्तर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। दिल्ली के लोगों की सुबह धुंध की मोटी चादर से हो रही है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर इसका कुछ ज्यादा नकारात्मक असर पड़ रहा है। आशंका है कि दिवाली में इसकी मात्रा और बढ़ जाएगी। वैसे तो पूरे वर्ष दिल्ली में प्रदूषण का स्तर ऊंचा रहता है, मगर दिवाली के आसपास यह कहीं अधिक खतरनाक हो जाता है। इसके लिए दोषी निश्चित रूप से हम भी हैं, क्योंकि हमने अपने पर्यावरण का इतना दोहन कर दिया है कि उसका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ी पर पड़ना तय है। ऐसे में, हमें दिवाली में प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों से बचना चाहिए। दीपावली दीयों वाली होनी चाहिए, प्रदूषण वाली नहीं।
आशीष, राम लाल आनंद कॉलेज 
ashishgusain234@gmail.com

बीमार है रोजगार दफ्तर
पिछले दो माह से हम रोजगार दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं, पर रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है, क्योंकि रोजगार दफ्तर की ऑनलाइन सर्विस खराब चल रही है। यह हाल कनॉट प्लेस पर स्थित रोजगार दफ्तर का नहीं, बल्कि शाहदरा के रोजगार दफ्तर का भी है। हर बार वहां मौजूद अफसर यही कहते हैं कि रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन होगा, मगर इसमें अभी खराबी चल रही है। किसी दूसरे माध्यम से रजिस्ट्रेशन करने की बात कहने पर भी वह इनकार में सिर हिला देते हैं। संबंधित विभाग इस समस्या पर ध्यान दे और इंप्लॉयमेंट एक्सचेंज की ऑनलाइन सर्विस को तुरंत ठीक करवा दें।
संजय नौटियाल
shubhamnautiyal048@gmail.com

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