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दिवाली दीयों वाली

कल दीयों का त्योहार दिवाली है। लोगों में इसे लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सभी अपने-अपने घरों की साफ-सफाई और उसे बिजली की सुंदर-सुंदर लड़ियों से सजाने में व्यस्त हैं। मगर हमें यह जरूर जानना चाहिए कि दिवाली का त्योहार मूलत: है क्या? यह बम-पटाखों या लड़ियों का त्योहार नहीं है, बल्कि जब श्रीराम अपना वनवास खत्म करके वापस अयोध्या लौटे थे, तो खुशी में अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाए थे और इसने अमावस्या भरी अंधेरी रात को उजाले से भर दिया था। आज भी इसी सोच को अपनाने की जरूरत है। हम लड़ियां खरीदने में इतने मशगूल हो जाते हैं कि हमें गरीब कुम्हारों का ध्यान ही नहीं रहता। अमावस्या की अंधेरी रात को चाइनीज लाइट रोशन नहीं कर सकती, जबकि दीये जलाने से हम उन लोगों की जिंदगी भी रोशन कर पाएंगे, जो दीये बनाते और बेचते हैं। आखिरकार सभी के साथ मिल-जुलकर खुशियां मनाना ही तो  त्योहार का मूल अर्थ है।
निशांत रावत
 डॉ भीमराव आंबेडकर कॉलेज

राम मंदिर बनाए सरकार
वर्ष 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी, तब पार्टी ने संविधान व कानून के दायरे में रहते हुए प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में भव्य मंदिर बनाने का वादा किया था। मगर आज सरकार बने हुए साढ़े चार वर्ष हो चुके हैं, लेकिन उसकी तरफ से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है। अगर मामला राम मंदिर की बजाय जातियों के आरक्षण का होता, तो निश्चय ही आम लोग भी भारत बंद का एलान करते हुए सरकारी सपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे होते और सरकार भी उनके आगे झुकती दिखती। मगर राम मंदिर के मामले में ऐसा नहीं है। हम कल प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में दीपावली मनाने जा रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से तमाम हिंदुओं की आस्था के प्रतीक रामलला अब भी तंबू में विराजमान हैं। सरकार को अध्यादेश लाकर तुरंत अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर बनवाना चाहिए।
आशुतोष बत्रा
सहारनपुर, उत्तर प्रदेश

केंद्र का तोहफा
दिवाली पर लघु और मध्यम उद्योगों को केंद्र सरकार की तरफ से तोहफा दिया गया है। अब केवल 59 मिनट में एमएसएसई के तहत आने वाले उद्योगों को एक करोड़ रुपये तक का लोन उपलब्ध हो जाएगा। यह निर्देश उस सर्वे की प्रामाणिकता को भी दर्शाता है कि भारत दस्तावेजों में नहीं, बल्कि हकीकत की जमीन पर भी विकास की राह पर है। यदि ऐसा ही चलता रहा, तो वह दिन दूर नहीं, जब भारत में बेरोजगारी की दर कम हो जाएगी और नौजवानों को नौकरी के लिए यहां-वहां धक्के न खाने पड़ेंगे। इन सबसे देश में व्यापार करना सरल हो जाएगा और लोगों की माली जरूरतें भी पूरी हो जाएंगी।
मुग्धा भारती, दिल्ली विवि

विरोध की राजनीति
इस बार दिवाली में दिल्ली वालों को सरकार की तरफ से बतौर तोहफा सिग्नेचर ब्रिज मिला है। 14 साल के लंबे इंतजार के बाद अब इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया है। इस ब्रिज की ऊंचाई कुतुब मीनार से भी दोगुनी है। हालांकि उद्घाटन समारोह से ऐन पहले भाजपा नेता मनोज तिवारी के साथ आम आदमी पार्टी के नेता की तीखी झड़प भी  हुई। वैसे देखा जाए, आज के समय में राजनीति का ऐसा स्वरूप हो गया है कि लगता है, किसी को जनता की कोई परवाह नहीं। जनता के लिए काम हो रहा है या नहीं, यह जानने-समझने की बजाय नेतागण आपस में एक-दूसरे का विरोध शुरू कर देते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि एक-दूसरे पर जितना कीचड़ उछालेंगे, उतने खुद ताकतवर होंगे। सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाटन समारोह कुल मिलाकर ऐसा ही था। 
साक्षी दुबे
 श्रीगुरु नानक देव खालसा कॉलेज

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