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12 नबम्बर, 2019|11:13|IST

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निषाद के बाद जॉर्ज

मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र के लोगों के लिए यह वाकई दुख की बात है कि उनकी नुमाइंदगी कर चुके दो पूर्व सांसदों कैप्टन जयनारायण निषाद और अब जॉर्ज फर्नांडिस ने बीते दो महीनों के भीतर इस दुनिया को अलविदा कह दिया। निषाद की मृत्यु दिसंबर के हुई थी। इन दोनों राजनेताओं ने लंबे समय तक लोकसभा में मुजफ्फरपुर का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन कई सरकारों में इनके मंत्री रहने के बावजूद मुजफ्फरपुर विकास के लिए तरसता रहा। वीपी सिंह सरकार में जॉर्ज रेल मंत्री रहे, मगर मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन की दयनीय हालत का अंदाजा आप वहां खुद उतरकर देख सकते हैं। जनता सरकार में बतौर उद्योग मंत्री जॉर्ज ने मुजफ्फरपुर को कांटी थर्मल पावर स्टेशन जरूर दिया, मगर उसके बाद वह केंद्रीय राजनीति में इस कदर डूबे की स्थानीय आकांक्षाएं उनसे अछूती रह गईं। खैर, ये दोनों ही नेता जनता से अपने सहज संपर्क के लिए हमेशा याद रखे जाएंगे। इनके घरों के दरवाजे अपने क्षेत्र के नागरिकों के लिए हमेशा खुले रहते थे।
अखिलेश महतो 
ब्रह्मपुरा, मुजफ्फरपुर  

बुरी नहीं होती बेबाकी
लोकतंत्र में सभी को मर्यादा के अंदर अपने विचार अभिव्यक्त करने का अधिकार है। चाहे वह व्यक्ति नेता हो, अभिनेता हो या फिर आम जन। इसीलिए लोकतंत्र को सबसे उच्च कोटि की शासन-व्यवस्था कहा जाता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का पिछले कुछ महीनों में जो बयान आया है, वह दलगत राजनीति से बिल्कुल अलग जान पड़ता है। अभी चंद दिनों पहले उन्होंने कहा कि जो राजनेता वादाखिलाफी करते हैं, उन्हें जनता पीटती है। पिछले दिनों जब पांच राज्यों में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा था, उस वक्त भी किसी अन्य भाजपाई में यह कहने की हिम्मत नहीं थी कि नेतृत्व को पराजय की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। मतलब जो बातें आलोचक बोलते हैं, वही बात अगर नितिन गडकरी बोलने की हिम्मत करते हैं, तो उन पर हमें नाज होना चाहिए। सरसरी तौर पर लगेगा कि वह पार्टी के विरोध में काम कर रहे हैं, लेकिन गहराई से सोचिए, तो वह पार्टी-हित में काम कर रहे हैं। जनता में सरकार के प्रति जो रोष पनप रहा है, उससे वह अपने दल को सचेत कर रहे हैं। 
जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर 
jbsingh.bbc@gmail.com
संतुलित बजट बनाएं
अबकी बार गांधीजी के विचारों वाला बजट होना चाहिए। उन्होंने कहा था कि नीतियां बनाते समय समाज के सबसे गरीब इंसान का चेहरा निगाहों में होना चाहिए। यह बात सही है कि जितना ज्यादा गरीब, किसान और बेरोजगार खुश होगा, बजट उतना ही कारगर कहलाएगा। माना कि सीमित संसाधन में सबको खुश करना मुमकिन नहीं। फिर भी इस बजट से बेरोजगारों, गरीबों और किसानों को सकारात्मक संदेश मिलना चाहिए। गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों को अगर यह बजट संतुष्ट कर सका, तो जनता की नजर में सरकार की स्थिति मजबूत होगी। 
देवेंद्र नेनावा, इंदौर 
mahesh_nenava@yahoo.com
सेवा का सम्मान 
कुछ लोग केवल स्वयं के लिए कर्म करते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग राष्ट्र-निर्माण और समाज कल्याण को पहला दर्जा देते हैं। ऐसे ही लोगों को हमारा समाज युगों-युगों तक याद करता है। ऐसे लोग जब पुरस्कृत होते हैं, तो इससे लोकहित में काम करने के लिए लोगों को प्रेरणा मिलती है। वैसे तो किसी सम्मानित व्यक्ति का सम्मानों या पुरस्कारों से कुछ लेना-देना नहीं होता, कर्म ही उसका सच्चा और सबसे बड़ा धर्म होता है। अभी-अभी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है। कई अन्य लोगों को पद्म सम्मानों से सम्मानित किया गया है। मगर ऐसे अनेक कर्मठ लोग हैं, जो सम्मान से वंचित हैं। जरूरत है, ऐसे लोगों को जानने, उनसे सीखने की।

एकता
palekta2001@gmail.com

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