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नई सरकार की चुनौती

नई सरकार को यह विचार करना होगा कि इस देश का भविष्य अतीत के विवादों से आगे जाने पर ही निर्मित होगा। और यह तभी संभव है, जब लोकतंत्र न तो पूंजीपतियों के हाथों का खिलौना बने और न ही सियासी विमर्श कटुता से भर जाए। इसके लिए आवश्यक है कि अनैतिक साधन से जीतने वालों के मुकाबले नैतिक साधन का प्रयोग करते हुए हार जाने वालों का सम्मान बढ़े। लोकतंत्र सिर्फ लोकतांत्रिक समाज से बनता है, और समाज बनता है पराजय व सहनशीलता को समझने वाले मैत्री भाव से। इसी मैत्री भाव को ग्रहण करने के लिए संविधान निर्माता आंबेडकर ने बौद्ध दर्शन का अनुसंधान किया था। न्याय और निष्पक्षता को शासन की नीति बनाया जाए। सामाजिक लोकतंत्र के लिए विविध संगठनों को काम करने की छूट दी जाए और लोकतांत्रिक संस्थाओं का विकेंद्रीकरण किया जाए। भारत के विचार में यह संभव है, लेकिन तभी जब भारत जैसी सभ्यता के मर्म को समझा जाए।

युधिष्ठिर लाल कक्कड़, गुरुग्राम


गलतियां सुधारे कांग्रेस

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने एक बार फिर सत्ता हासिल करके गैर-कांग्रेसी सरकार का लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत से सरकार न बना पाने की परंपरा तोड़ दी है। मगर सवाल यह है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी आखिर हाशिए पर कैसे चली गई? क्यों देश का विश्वास उस पर से उठता जा रहा है? लोकतंत्र में जितनी अहमियत लोगों द्वारा चुुनी गई सरकार की होती है, उतनी ही मजबूत विपक्ष की भी होती है, लेकिन कांग्रेस मोदी सरकार के मजबूत विपक्ष में भी खड़ी नजर नहीं आ रही। दरअसल, बिना मजबूत सेनापति के कभी भी कोई लड़ाई नहीं जीती जा सकती। कांग्रेस ने अगर विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली हार का मंथन किया होता और लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए राजनीति का कोई सुलझा चेहरा सामने लाया होता, तो शायद चुनाव के नतीजे कुछ और होते। सच यह भी है कि कई लोग राहुल गांधी को आज भी राजनीति का कच्चा खिलाड़ी मानते हैं। राहुल को अपनी यह छवि तोड़नी होगी। अच्छा होगा कि कांग्रेस ईमानदारी से अपनी हार का मंथन करे और गलतियों को सुधारने का प्रयास करे, तभी उसे सफलता मिल सकेगी।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर


पानी का संकट

केंद्र हो या राज्य सरकार, जल का व्यर्थ दोहन रोकने के लिए वे आए दिन तमाम तरह की घोषणाएं करती रहती हैं, लेकिन उन पर कितना अमल हो रहा है, इसको लेकर वे गंभीर नजर नहीं आतीं। आलम यह है कि आज समर सेबल की इतनी बढ़ोतरी हो गई है कि पानी काफी ज्यादा बरबाद हो रहा है। हैंडपंप में आवश्यकता के मुताबिक लोग पानी निकाल लेते हैं, लेकिन समर सेबल में भारी मात्रा में जल की बरबादी होती है। यदि सरकारें जल्द नहीं जागेंगी, तो जल्द ही पीने के लिए शुद्ध जल का भी संकट बढ़ जाएगा।

जसबीर सिंह सिसोदिया, अलीगढ़


बच्चों को आजादी दें

सीबीएसई के बंपर नतीजे के बाद अब इंतजार है, तो पहली कटऑफ लिस्ट का, ताकि छात्र विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। उम्मीद है कि माता-पिता बढ़ती प्रतिस्पद्र्धा के कारण अपने बच्चों पर अपनी इच्छा नहीं थोपेंगे और अपना भविष्य उन्हें स्वयं चुनने देंगे। माता-पिता असल में अपने बच्चों पर कभी-कभी इतना दबाव डाल देते हैं कि बच्चे आत्महत्या करने तक को मजबूर हो जाते हैं। शहरों के अमीर और शिक्षित परिवारों में आत्महत्या की यह प्रवृत्ति ज्यादा देखने को मिलती है। इसलिए माता-पिता को जानना व समझना होगा कि बच्चों को अपनी योग्यता के अनुसार, अपना भविष्य चुनने दें। आज हर क्षेत्र में करियर की संभावनाएं हैं। जरूरत है, तो बस बच्चों की प्रतिभा निखारने की।

संध्या, डीयू

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