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पराक्रम की गाथा

 

 

26 जुलाई, 1999 को भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय को सफलतापूर्वक अंजाम देकर कारगिल को पाकिस्तानी घुसपैठियों के चंगुल से मुक्त कराया था। इसी की याद में हर साल 26 जुलाई को विजय दिवस मनाया जाता है। यह दिन है उन शहीदों को याद कर श्रद्धा-सुमन अर्पण करने का, जो हंसते-हंसते मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। पूरे दो महीने से ज्यादा दिनों तक चले इस युद्ध में भारतीय थल सेना और वायु सेना ने नियंत्रण रेखा न पार करने के आदेश के बावजूद आक्रमणकारियों को मार भगाया। युद्ध में 500 से अधिक भारतीय सैनिक शहीद हुए, जबकि 1,300 से ज्यादा घायल हुए। शहीदों ने भारतीय सेना की शौर्य व बलिदान की उस सर्वोच्च परंपरा का निर्वाह किया, जिसकी सौगंध हर सिपाही तिरंगे के समक्ष लेता है। ये अमर बलिदानी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, मगर इनकी यादें हमारे दिलों में हमेशा-हमेशा के लिए बसी रहेंगी।

अमन सिंह, बरेली, उत्तर प्रदेश


ट्रंप का दांव

कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान बेतुका है। भला ट्रंप साहब को कौन समझाए कि कश्मीर शुरू से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है। यह देश का स्वाभिमान है और संप्रभुता की पहचान है। हकीकत तो यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही नहीं, हिन्दुस्तान के किसी भी दल का कोई भी नेता कभी ऐसी बात (कश्मीर मध्यस्थता) नहीं कह सकता। मध्यस्थता-राग अलापना तो पाकिस्तानी फितरत का हिस्सा है। दरअसल, ट्रंप अब चुनावी मोड में हैं। दूसरे कार्यकाल के लिए विरोधी मतों में सेंध लगाने के लिए लगातार यू-टर्न लिए जा रहे हैं। हाल ही में ईरान, चीन और जापान से जुड़े कई मामले ऐसे रहे, जहां उन्होंने अपने फैसलों-वादों को ही पलट दिया। गौरतलब यह भी है कि ‘वाशिंगटन पोस्ट’ नामक अखबार ने यह सार्वजनिक कर दिया है कि ट्रंप ने अब तक कितने संदिग्ध दावे किए हैं। इसलिए भारत को लेकर उनकी अनर्गल बयानबाजी कतई स्वीकार नहीं की जा सकती।

हर्षवद्र्धन कुमार
 पूर्वी लोहानीपुर, पटना


बेहतर व्यवस्था बने

सावन के इस पवित्र माह में जिस प्रकार आस्था का सैलाब हरि की नगरी हरिद्वार की ओर उमड़ पड़ता है, उसे संभालने के लिए प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। प्रशासन और बेहतर तरीके से अपना काम कर सके, इसके लिए जरूरी है कि कांवड़ियों की संख्या का पहले से ही सही-सही अंदाजा हो। यदि सभी कांवड़ियों का एक माह पहले ऑनलाइन रजिस्टे्रशन कराया जाए, तो सही-सही आंकड़े जुटाए जा सकते हैं। इससे प्रशासन भी सही ढंग से इंतजाम कर सकता है। ऑनलाइन पोर्टल होने से बहुत सी अन्य जानकारियां जुटाने में भी मदद मिलेंगी। इसलिए आगामी कांवड़ माह से पहले प्रशासन को इसकी तैयारी कर लेनी चाहिए।

मनोज उपाध्याय, सहारनपुर


प्रतिभा-पलायन

हाल ही में भारत ने ‘चंद्रयान-2’ का प्रक्षेपण किया। इसरो-प्रमुख का कहना था कि भारत के युवा काफी प्रतिभाशाली हैं। हालांकि कुछ वैज्ञानिकों ने इसे लेकर असंतोष जताया कि भारत के नौजवान पलायन कर रहे हैं। आखिर नौजवान पलायन क्यों कर रहे हैं? भारत की शिक्षा प्रणाली काफी मजबूत मानी जाती है, जो बेहद प्रतिभाशाली व बुद्धिमान नौजवान पैदा करती है। इन नौजवानों की मांग दुनिया के कोने-कोने में है। परंतु संसाधनों और अच्छे पैकेज की कमी के कारण इन्हें भारत से पलायन करना पड़ रहा है। सरकार इस पर नियंत्रण करने के उपाय कर रही है, परंतु समस्या अब भी बनी हुई है। इन मसलों के समाधान के लिए सरकार को गंभीरता से बेहतर योजनाएं बनानी होंगी।

मोनिका कुशवाहा
 मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश
 

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