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रफ्तार की रानी

हिमा दास भले ही मुंह में चांदी का चम्मच लिए न पैदा हुई हों, लेकिन पैरों से सोना रौंदने की काबिलियत रखती हैं। देश जहां बेटियों की सुरक्षा के लिए फिक्रमंद है, वहीं हिमा बेफिक्री से दुनिया को पैरों से नापने चल पड़ी हैं। एक महीने के भीतर पांच स्वर्ण पदक जीतना कोई बच्चों का खेल नहीं। मगर रफ्तार की इस नई रानी ने यह कारनामा कर दिखाया है। जिस गोल्डन गर्ल ने अपनी रफ्तार से हिन्दुस्तान को स्प्रिंट की दुनिया में पहली पायदान पर ला खड़ा किया है, मुल्क उन पैरों को आसमान पर उठा लेना चाहता है। गौरव के ये पल न केवल हिमा और हिमा के परिवार वालों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण हैं। देश की महिलाओं ने जिंदगी के हर क्षेत्र में अपने झंडे गाड़े हैं। जाहिर है, हिमा अगली पीढ़ी के लिए फरिस्ता बनकर उभरी हैं। उम्मीद है कि इस होनहार धावक की रफ्तार कभी कम न होगी।

एम के मिश्रा, रातू, रांची


मूल्यों का अभाव

कर्नाटक का सियासी नाटक हमारी राजनीति के चाल, चरित्र और चेहरे को एक बार फिर उजागर कर गया। कुमारस्वामी की गठबंधन सरकार का पतन और भाजपा का सत्ता पर काबिज होने का प्रयास राजनीति के विकृत स्वरूप को व्यक्त कर रहा है। जहां तक राजनीति में लोकतांत्रिक शुचिता खोजने का प्रश्न है, तो निश्चय ही जिन लोकतांत्रिक मूल्यों की अवहेलना करके चुनाव के बाद गठबंधन सरकार का गठन किया गया था, उसका पटाक्षेप जैसे को तैसा की तर्ज पर ही होना था। चिंतनीय यह है कि राजनीतिक आचरण में शुचिता की बात किस आधार पर की जाए, जब सभी राजनीतिक दल नैतिकता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने से परहेज कर रहे हैं। इस प्रकार के आचरण से आम आदमी यह विचार करने के लिए विवश है कि वर्तमान परिदृश्य में जन-प्रतिनिधियों की निष्ठा पर किस प्रकार विश्वास किया जाए?

सुधाकर आशावादी, मेरठ


भ्रामक बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप झूठ बोलने में महारथी हैं। कश्मीर ही नहीं, कई मामलों में अब तक वह पौने ग्यारह हजार से ज्यादा भ्रामक दावे कर चुके हैं। यह बात अमेरिकी अखबार ‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने कही है। अखबार ने दावा किया है कि ट्रंप ने राष्ट्रपति का कार्यभार संभालने के बाद से लगभग हर रोज औसतन 12 संदिग्ध दावे किए। इसीलिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका से मध्यस्थता की कोई बात कही होगी, यह भी ट्रंप का भ्रामक बयान है। हां, इस बयान से देश की सियासत जरूर गरम हो गई है। विपक्ष को बोलने का मुद्दा मिल गया है। विदेश मंत्री इस बयान को खारिज कर चुके हैं। इसलिए विपक्ष को भी इस झूठे और भ्रामक बयान पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। कश्मीर समस्या का हल द्विपक्षीय तरीके से ही निकलेगा।

प्रदीप कुमार दुबे, देवास


ऑपरेशन कमल

23 जुलाई को प्रकाशित ‘ऑपरेशन कमल की वापसी के बाद’ लेख पढ़ा। आजकल विभिन्न दलों के विधायक, सांसद अपने दल को छोड़कर तेजी से बीजेपी का दामन थाम रहे हैं। भाजपा भी इस ऑपरेशन की सफलता से खुश है। लेकिन जनता की नजर में पाला बदली का यह खेल अवसरवादिता की राजनीति को बढ़ावा देने वाला ही कहलाएगा। ऐसे दलबदल वैचारिक तौर पर नहीं, बल्कि सत्ता, पद और पैसे पाने के लिए किए जाते हैं। इससे राजनीतिक शुचिता पर भी आंच आती है। इसीलिए भाजपा के लिए यह विचारणीय सवाल होना चाहिए कि ऐसे अवसरवादी लोग पार्टी को कितना मजबूत बनाएंगे? कितनी गारंटी है कि ये लोग बीजेपी में आने के बाद दलबदल का यह खेल फिर नहीं खेलेंगे? समग्र बातों पर विचार करके ही ‘ऑपरेशन कमल’ चलाया जाना चाहिए।

राम प्रकाश शर्मा, वसुंधरा
 

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