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सच्ची श्रद्धांजलि

दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वापजेयी को सब अपनी-अपनी तरह से याद कर रहे हैं। मगर मेरा मानना है कि वाजपेयी जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी उनकी उस धारा को आगे बढ़ाना, जिसमें अमेरिका और इजरायल से दोस्ती आगे बढ़ाना, परमाणु विकास कार्यक्रम और मिसाइल के क्षेत्र में उनके विरोध को दरकिनार करना, रूस व चीन को बराबर प्राथमिकता देना और पड़ोस की तरफ सांस्कृतिक-आर्थिक सहयोग का हाथ बढ़ाना शामिल हो। गांधीवादी समाजवाद की अवधारणा पर तेज कदमों से चलना और समन्वयकारी सोच के साथ आगे बढ़ना भी इसी धारा का हिस्सा है। क्या हम ऐसा कर पाएंगे? अगर कर सके, तो यही वाजपेयी जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
शर्मिला कुमारी

शर्म क्यों नहीं आती
बिहार के बिहिया में पढे़-लिखे लोगों की जमात, शासन-प्रशासन के नुमाइंदे, नारी सशक्तीकरण के अगुआ आदि सभी होंगे, फिर भी कुछ लोग एक महिला को निर्वस्त्र करके भरे बाजार घुमाते रहे और किसी की आंखें गीली नहीं हुईं? पूरा देश ‘आधी आबादी’ की नंगी तस्वीर को देखता रहा। कहां गए वे नैतिकता के पैरोकार और सुशासन के ठेकेदार? वे कहते हैं कि कानून अपना काम करेगा, मगर जब व्यवस्था ही अपंग हो, तो कानून से भला कितनी उम्मीद की जाए? दुनिया के अखबारों में खबरें होंगी, मगर वह लुटी हुई आबरू न होगी, जिसे भेड़ियों ने नोच डाला है। राजनीति, हम तुम्हारे ‘शुक्रगुजार’ रहेंगे! अगर हो सके, तो हमारे नौजवानों को अब बख्श दो।
एम के मिश्रा, रातू, रांची

अब्दुल्ला से बदतमीजी
जम्मू-कश्मीर के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का जिस ढंग से ईद की नमाज के समय विरोध किया गया और उनके खिलाफ नारेबाजी हुई, वह अत्यंत चिंताजनक स्थिति का संकेत है। भारतीय सेना के सघन अभियान के बावजूद आतंकी हमलों में तेजी आई है, जो यह बताता है कि घाटी में आतंकियों का प्रभाव बढ़ा है। केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त वार्ताकार भी सफल नहीं हो पाए। इससे लगता है कि अब और अधिक अभिनव प्रयास की जरूरत है। कश्मीर के जीवन को पटरी पर लाना जरूरी है।
नर सिंह, मेरठ

अनीता बोस की अपील
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों को प्रत्येक राज्य की प्रमुख नदियों में प्रवाहित करने का सरकार का फैसला स्वागतयोग्य है। इसी क्रम में केंद्र सरकार को अनिता बोस फाक की अपील पर भी ध्यान देना चाहिए। अनिता अब तक कफन से वंचित भारत रत्न नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुत्री हैं। उन्होंने अपनी वेदना जाहिर करते हुए भारत और जापान की सरकारों से अनुरोध किया है कि विसर्जन के लिए नेताजी की अस्थियों को जापान से भारत भेजने की व्यवस्था की जाए। जिस प्रकार मोदी सरकार ने नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक किया, उसी तरह वह नेताजी की बेटी की अपील को देशवसियों की अपील मानकर इस दिशा में प्रयास करे। यह नेताजी के प्रति उसका सम्मान दिखाएगा।
सुरजीत झा, गोड्डा

बकरीद पर मातम
चाहे मीठी ईद हो या फिर बकरीद, इनका आतंकियों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर फर्क पड़ता, तो इन खास मौकों पर वे कायराना हरकतें नहीं करतं। कुलगाम में बकरीद की नमाज से लौटते एक पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या, पुलवामा में एक भाजपा कार्यकर्ता की हत्या जैसे निंदनीय काम उन लोगों के नहीं लगते, जिनका ईमान खुदा पर है।  इन दहशतगर्दों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन
 

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