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13 नबम्बर, 2019|7:13|IST

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पुराने कर्मियों की सुध लें

खबरों के मुताबिक, दिल्ली विश्वविद्यालय में कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने की समय-सीमा 31 मार्च, 2019 रखी गई है। इस प्रक्रिया को लाकरते समय डीयू के अधिकारियों को संविदा कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखना चाहिए और उन्हें नियुक्ति में वरीयता देनी चाहिए। वर्तमान में यहां का बहुधा स्टाफ ठेके पर काम कर रहा है। कई तो 10-15 वर्षों से कार्यरत हैं। इन्हें हर छह महीने के बाद एक दिन का ब्रेक दिया जाता है। समय के साथ चूंकि इनकी उम्र बढ़ती गई है, इसलिए अन्य संस्थानों में इनके लिए दरवाजे बंद हो चुके हैं। ऐसे में, इन्हें नौकरी से निकालना या स्थाई नियुक्ति में इन्हें वरीयता न देना, अन्याय होगा। दुखद है कि चुनाव के समय इन्हें नियमित करने का भरोसा तो दिया जाता है, पर बाद में सब भूल जाते हैं। इन कर्मियों का दर्द सुना जाना चाहिए।
माया चावला
 पश्चिम विहार, नई दिल्ली- 87

आधार से जोड़ें वोटर लिस्ट
चुनाव आयोग मतदाता सूची में सुधार के लिए खूब जोर लगा रहा है। मगर अब भी कई राज्यों में मतदाता सूची के अधूरे होने और उनमें फर्जी नाम जुड़ने की शिकायतें मिल रही हैं। मतदाताओं के एक से अधिक स्थानों पर नाम अब भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में, चुनाव आयोग को चाहिए कि वह मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने का काम करे। इससे कई फर्जी मतदाता पकड़ में आ जाएंगे और भविष्य में कोई एक से अधिक स्थानों पर नाम नहीं जुड़वा सकेगा।
युधिष्ठिर लाल कक्कड़
 गुरुग्राम, हरियाणा
प्रकृति से छेड़छाड़ 
‘सेक्स सॉर्टेड सीमन’ का उत्पादन अक्तूबर से शुरू हो गया है। अब इस तकनीक के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान द्वारा सिर्फ बछिया पैदा हो सकेगी। इस प्रकार के कदम निश्चित रूप से अनैतिक और प्रकृति के नियमों के खिलाफ हैं। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि लाने के लिए उठाया गया यह कदम चिंताजनक है। जब यही तकनीक अपनाना है, तो देश में लिंगानुपात सुधारने के लिए यह क्यों नहीं उठाया जाता? इतना ताम-झाम और बेटी बचाने के लिए अभियान चलाने की भला क्या जरूरत है? मेरा मानना है कि किसी खास लिंग के जीव पैदा करने के कदम दुस्साहसी हैं। इसके भविष्य में बुरे परिणाम देखने को मिल सकते हैं। दुखद है कि प्रकृति से छेड़छाड़ के इतने दुष्परिणाम देखने के बाद भी हम संभल नहीं रहे हैं।
मनहरण, शिवपुरी, अररिया
myblogkkj@gmail.com
खलनायक है यह नियम
क्रिकेट में डकवर्थ लुईस नियम किसी खलनायक से कम नहीं है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहले ट्वंटी- 20 में 17 ओवर के खेल में ऑस्ट्रेलिया से ज्यादा रन बनाने के बाद भी भारत मैच हार गया। यह बात हजम नहीं होती। भले ही अभी इसी नियम के तहत बाधित मैचों का नतीजा घोषित होता है, लेकिन इस नियम को लेकर विवाद भी कम नहीं हुए हैं। इसीलिए आईसीसी को नए नियम की खोज करनी चाहिए। अब एक ऐसा नियम बनना चाहिए, जो खेल को खेल रहने दे, उसे जटिल गणित न बनाए।
मोहित, इंदिरापुरम, गाजियाबाद 
संस्थाओं का मान
भारतीय प्रजातंत्र की जीवंतता के लिए जरूरी है कि इसकी तमाम संस्थाएं निष्पक्ष और लोकतांत्रिक ढंग से काम करें। इनमें खासतौर से चुनाव आयोग, न्यायालय, प्रेस आदि की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन पिछले कुछ समय में घटी एक के बाद दूसरी घटनाओं से इन संस्थाओं पर अविश्वसनीयता के बादल छा गए हैं। ताजा उदाहरण सीबीआई में मची उठापटक का है, जिसके निवारण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से भी जनमानस में अविश्वास पैदा हुआ है। अब तो इन संस्थाओं के प्रभावी बने रहने की कामना करते रहने के अतिरिक्त कुछ और विकल्प नहीं सूझ रहा।
नर सिंह
 मेरठ, उत्तर प्रदेश
narsingh2323@gmail.com 

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