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ताकि अर्थव्यवस्था सुधरे

सरकार को अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अपनी तीन नीतियों में परिवर्तन करना चाहिए। पहली, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड टं्रप से सबक लेते हुए संरक्षणवाद को अपनाना चाहिए। देश में भ्रष्टाचार, न्यायिक विवादों और प्रदूषण नियंत्रण के खर्च के कारण हमारे उद्योगों पर लागत का जितना बोझ बढ़ता है, उस अनुपात में चीन से होने वाले आयात पर कर बढ़ाना चाहिए, ताकि हमारे उद्यमी उनसे प्रतिस्पद्र्धा में टिक सकें। दूसरी नीति, सरकार को मेक-इन-इंडिया के तहत बड़ी स्वदेशी व बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मोह छोड़कर अपने छोटे उद्योगों को संरक्षण देना चाहिए। जीएसटी आदि में उन्हें छूट देनी चाहिए, ताकि बड़ी कंपनियों के सम्मुख वे टिक सकें और रोजगार सृजन कर सकें। तीसरी, सरकार को वित्तीय घाटे पर नियंत्रण की बजाय राजस्व घाटे को कम करने को अपना लक्ष्य बनाना चाहिए। समस्या सरकार द्वारा लिए जाने वाले कर्ज की नहीं है। समस्या खपत की है। सरकार अपनी खपत कम करे और निवेश बढ़ाए, तो अर्थव्यवस्था चल निकलेगी।

नवीनचंद्र तिवारी, रोहिणी, दिल्ली- 85


आत्मालोचना भी करे मीडिया

पत्रकारिता का बुनियादी उसूल है कि रिपोर्टिंग से किसी सूरत में जनहित को नुकसान न पहुंचे। लेकिन जिस तरह से मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की आईसीयू में मीडिया के लोग अपने कैमरे और माइक लेकर पहुंचे और डॉक्टरों के काम को बाधित किया, वह गैर-जिम्मेदारी के साथ-साथ अनैतिक कृत्य भी था। आखिर जहां एक-एक पल किसी मासूम की सांसों पर भारी हो, वहां कोई डॉक्टर इलाज से जूझे या मीडिया वालों के सवालों से? पत्रकारों को सवाल सरकार और अस्पताल प्रशासन से पूछना चाहिए था, न कि बच्चों के इलाज में जुटे डॉक्टरों से। मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के एंकर दूसरों को नसीहतें बहुत बांटते हैं, मगर अपने आचरण पर कभी गौर नहीं करते। हालांकि प्रिंट और डिजिटल माध्यम के कई बडे़ पत्रकारों ने संवेदनशीलता का परिचय भी दिया है। माइक पकड़े टीआरपी लोभी पत्रकारों को उनसे सीखना चाहिए।

आराध्या सिंह, दाऊदपुरकोठी, एमआईटी, मुजफ्फरपुर-23 

बेहतर विदाई के हकदार 

भारतीय क्रिकेट का बड़ा सितारा रहे युवराज सिंह ने आखिरकार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह अपने फैंस को भावुक कर दिया। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक हर जगह युवराज की चर्चा है। कोई उनके छह छक्कों वाले मैच की कहानी कह रहा है, तो कोई 2011 के विश्व कप में उनकी शानदार बल्लेबाजी की प्रशंसा कर रहा है। युवराज विश्व क्रिकेट के इकलौते खिलाड़ी हैं, जिनके नाम टी-20 इंटरनेशनल में एक ओवर की छह गेंदों पर छह छक्के लगाने का रिकॉर्ड दर्ज है। इसके अलावा, महज 12 गेंदों में अद्र्धशतक जड़ने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है। इसीलिए लोग युवराज को एक बेहतर विदाई का हकदार बता रहे हैं। यहां तक कि टीम इंडिया के उप-कप्तान रोहित शर्मा तक ने अपने एक ट्वीट के माध्यम से इस सवाल को मुखर कर दिया। 

अमन सिंह, बरेली 


लोकसभा में लगे नारे

मंगलवार को लोकसभा में जब कुछ सांसद अपनी सदस्यता की शपथ ले रहे थे, तब कई नारे गूंजे। ये धर्म विशेष से जुड़े नारे थे। संसद देश की सबसे बड़ी पंचायत है और वहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सर्वोपरि है। मगर संसदीय परंपरा ही नहीं, धार्मिक गरिमा का तकाजा भी यही कहता है कि ऐसे नारे किसी को उकसाने या चिढ़ाने के लिए वहां नहीं लगने चाहिए थे। सदस्य अभी अपनी नई पारी की शुरुआत ही कर रहे हैं। यह वक्त सदन में एक-दूसरे को जानने-समझने का है। बड़ी संख्या में नए सांसद चुनकर आए हैं। उन्हें तो संसदीय परंपरा अभी सीखनी है। ऐसे में, शुरुआत से ही सदन का माहौल गरम करना कतई अच्छा नहीं है। 

मोहित नारायण, उना अपार्टमेंट, इंद्रप्रस्थ एक्सटेंशन, नई दिल्ली- 92
 

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