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अनुचित विरोध

पिछले दिनों 68,500 शिक्षकों की भर्ती का रिजल्ट घोषित हुआ। आश्चर्यजनक रूप से लगभग सवा लाख अभ्यर्थियों में से 41,500 अभ्यर्थी ही पास हो सके और 27,000 के लगभग पद खाली रह गए। इस भर्ती का कट ऑफ सामान्य और ओबीसी के लिए 45 प्रतिशत और एससी-एसटी का कट ऑफ 40 प्रतिशत रहा। आज के समय में पदों का खाली रह जाना निश्चित रूप से हैरान करने वाला है। क्या भारी संख्या में प्रशिक्षु बेरोजगारों के होते हुए पदों का खाली रह जाना निराशाजनक नहीं है? एनसीटीई के एक निर्णय का कि ‘बीएड प्रशिक्षु भी प्राइमरी में नियुक्त हो सकेंगे’, बीटीसी प्रशिक्षु विरोध कर रहे हैैं, जबकि राज्य सरकार दिसंबर तक 95,500 अध्यापकों की भर्ती पूरा करना चाहती है। ऐसे में, इनका विरोध क्या जायज है?
प्रताप सिंह, सैडभर, बागपत

अब जनता के दरबार में
आम चुनाव में अभी करीब दस महीने बचे हैं, मगर हमारे देश के राजनेताओं द्वारा अभी से ही आरोपों-प्रत्यारोपों की राजनीति शुरू की जा चुकी है। इस बार विपक्ष को एक ऐसा मुद्दा हाथ लगा है, जिसे वह जोर-शोर से उठा सकती है। नोटबंदी और रफाल डील जैसे मुद्दों पर कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपना लिए हैं। कुछ दिनों पहले ही नोटबंदी को लेकर रिजर्व बैंक ने देश के सामने आंकड़े पेश करते हुए बताया था कि 99.3 प्रतिशत पुराने नोट सिस्टम में वापस आ चुके हैं। इसका साफ मतलब यह है कि कालाधन के मामले में नोटबंदी सरकार के लिए कारगर हथियार साबित नहीं हुई। कहा जाता है कि लोकतंत्र में जनता चुनाव में अपना जवाब देती है, तो अब चुनाव परिणाम से पता चल पाएगा कि देश की जनता नोटबंदी से सहमत थी या असहमत?
    पीयूष कुमार, नई दिल्ली 

महिलाओं ने जलवा बिखेरा
आज 21वीं सदी में जहां भारत दिन-प्रतिदिन आगे बढ़ रहा है, वहीं महिलाएं भी देश की उन्नति में अपनी पूरी भागीदारी दे रही हैं। जो महिलाएं पहले घर-आंगन में ही काम करती थीं, वही हर रूढ़िवादी परंपरा को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं और समाज में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं, जिसका उदाहरण हाल के एशियन गेम्स हैं, जहां महिलाओं ने कड़ी मेहनत की वजह से एशियन गेम्स में गोल्ड प्राप्त करके भारत का नाम रोशन किया है। 
    मेघा, भीम राव आंबेडकर कॉलेज

प्रकृति से खिलवाड़
केरल त्रासदी, हिमाचल, उत्तराखंड में भू-स्खलन और बिजली गिरने जैसी तमाम घटनाओं ने देश के उस वर्ग को सोचने को मजबूर किया है, जो सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने के लिए येन-केन-प्रकारेण प्राकृतिक विकास को हानि पहुचाकर कंक्रीट के पहाड़ खडे़ कर रहे हैं। परिणाम सामने है। बड़े-बड़े भवन जमींदोज हो गए हैं, अंग्रेजों के समय का नैनीताल का माल रोड का कई मीटर लंबा हिस्सा ताल में समा गया है। क्या यह सब हमें चेतने के लिए काफी नहीं है? 
    विजय पपनै, फरीदाबाद

चरमराती कानून व्यवस्था 
पूर्वी दिल्ली में चरमराती कानून व्यवस्था चिंता का विषय है। दिन दहाड़े लूट-मार, डीटीसी बसों में पॉकेटमारी, महिला-शोषण, अवैध अतिक्रमण से आम जनमानस व्यथित है। इन वारदातों का संज्ञान लेने वाली दिल्ली पुलिस की वेबसाइट का सर्वर पिछले एक हफ्ते से काम नहीं कर रहा है, जिसके चलते लोग ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराने में विफल हैं। पूर्वी दिल्ली की जनता ने इस उम्मीद से लोकसभा चुनाव में बीजेपी तथा विधानसभा में आप प्रत्याशी को समर्थन दिया था कि कोई तो उनकी समस्याओं का संज्ञान लेगा, परंतु वर्तमान परिस्थिति को देखकर चुनावी वादे एक के बाद एक टूटते हुए लग रहे हैं। 
    गौरव, मयूर विहार 

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