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पुलों का सर्वेक्षण

 

 

मुंबई में फुटओवर ब्रिज गिरने से जो लोग मरे या घायल हुए, उसके लिए शत-प्रतिशत सरकार और रेलवे प्रशासन जिम्मेदार हैं। सरकार और प्रशासन अपना पल्लू झाड़ने की अब लाख कोशिश करें, लेकिन एक बार फिर रेल प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। अगर इस पुल की समय रहते सुध ले ली गई होती, तो शायद यह हादसा न होता। हमारे देश की सरकारों और प्रशासन की आदत बन चुकी है, किसी दुर्घटना या हादसे के बाद ही वे कुंभकर्णी नींद से जगते हैं और कुछ मुआवजे और झूठे आश्वासनों का मलहम लगाकर अगली दुर्घटना के इंतजार में लंबी तानकर सो जाते हैं। यह बहुत ही शर्मनाक और निंदनीय है। भविष्य में पुल हादसे न हों, इसके लिए सरकार और प्रशासन को देश के हर पुल की जांच करनी चाहिए और जो नए पुल बनाए जा रहे हैं, उनकी निर्माण-सामग्री पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर


आतंकवाद पर दोहरा रुख

अब तक सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले देश न्यूजीलैंड में भी आतंकवाद ने दस्तक दे दी है। वहां की दो मस्जिदों में आतंकवादियों ने गोलीबारी करके अनेक लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। विश्व में भारत आतंकवाद का सबसे बड़ा भुक्तभोगी देश है। भारत ने अनेक बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाई है, लेकिन पश्चिम के देशों और अभी तक आतंकवाद का सामना न करने वाले देशों ने कई बार भारत में हो रही आतंकवादी घटनाओं को बिल्कुल हल्के में लिया। सनद रहे, लंदन का एक प्रतिष्ठित समाचार नेटवर्क भारत में होने वाली आतंकवादी घटनाओं को आज भी ‘चरमपंथियों द्वारा की गई घटना’ बताता है। अमेरिका भी अपनी सुविधा के अनुसार आतंकवाद को ‘अच्छा और बुरा’ बताता रहा है। चीन भी अपने सामरिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आतंकवाद पर दोहरी नीति अपनाता रहा है। साफ है, आतंकवाद पर विश्व को एकजुट होकर समग्र नीति बनानी ही होगी, अन्यथा आतंकवाद दुनिया को खत्म कर देगा।

सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी


दुखद हमला

न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों में अज्ञात हमलावरों की गोलीबारी से हड़कंप मच गया। गोलीबारी के वक्त बांग्लादेश की क्रिकेट टीम मस्जिद के पास ही थी, लेकिन वह सुरक्षित बच निकलने में कामयाब रही। दहशतगर्दी कहीं भी हो, भारत उसका विरोध करता है और जो लोग व देश ऐसे हमलों में अपने लिए खुशी ढूंढ़ रहे हैं, उनके लिए यही कहना सही होगा कि धुआं जो कुछ घरों से उठ रहा है, न पूरे शहर पर छाए। एक मसला और भी है। आतंकवादियों को चीन आखिर क्यों पनाह देता है? वह अपने देश में मुस्लिमों पर अत्याचार कर रहा है और मसूद अजहर को वीटो करके बचा भी रहा है। न्यूजीलैंड जैसे शांत देश में आतंकी वारदातें दुखद हैं।

सुभाष बुड़ावन वाला, खाचरौद


चीन-नीति बदले भारत 

एक बार फिर चीन ने भारत की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए अपने वीटो का इस्तेमाल कर मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचा लिया। यह तो जगजाहिर है कि चीन जैसा देश सिर्फ और सिर्फ अपना स्वार्थ देखता है, क्योंकि अभी पाकिस्तान उसके हित में है, इसीलिए वह उसका बचाव कर रहा है। किंतु हमें यदि उसे झुकाना है, तो यह केवल आर्थिक नीति के आधार पर हो सकता है। भारत और चीन का व्यापार बहुत अधिक है व भारतीय बाजार से यह देश बहुत अधिक लाभ कमाता है। यदि कूटनीति के अलावा उसकी आर्थिक नीति पर भी कुछ चोट की जाए, तो शायद चीन अपनी नीति में बदलाव करे। अन्यथा हर बार की तरह इसी प्रकार संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश होंगे और चीन अडं़गा लगाता रहेगा।

कपिल सिंह, कुंजौ मैकोट, चमोली
 

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